Tuesday, August 18, 2026
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रातोंरात सरकारी आवास खाली कर PCS अलंकार अग्निहोत्री हुए ‘गायब’, बिना चार्ज हैंडओवर दिए छोड़ा बरेली

बरेली : उत्तर प्रदेश के चर्चित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री से जुड़ा मामला लगातार नया मोड़ ले रहा है। इस्तीफा देने और इसके तुरंत बाद सरकार द्वारा निलंबन की कार्रवाई के बाद अब वे आधी रात सरकारी आवास खाली कर शहर छोड़ चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने किसी को विधिवत चार्ज भी नहीं सौंपा, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

आधी रात आवास खाली, प्रशासन को नहीं दी जानकारी

सूत्रों के अनुसार, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात करीब 12:30 बजे अपने सरकारी आवास से अधिकांश सामान निकलवाया। सामान लदवाने के बाद वे खुद कार में बैठकर रवाना हो गए। प्रशासनिक नियमों के मुताबिक, चार्ज हैंडओवर किए बिना किसी अधिकारी का स्थान छोड़ना गंभीर लापरवाही मानी जाती है।

अधिकारी का ठिकाना अज्ञात

फिलहाल अलंकार अग्निहोत्री कहां हैं, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। प्रशासन उनकी लोकेशन का पता लगाने में जुटा है, जबकि आम जनता और राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

IIT से PCS तक का सफर

अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के PCS अधिकारी हैं। उन्होंने IIT BHU से बीटेक किया और लगभग 10 वर्षों तक आईटी सेक्टर में काम करने के बाद प्रशासनिक सेवा जॉइन की थी। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा था कि वे महामना मदन मोहन मालवीय के आदर्शों से प्रेरित होकर जनसेवा में आए थे।

यूजीसी नियम और शंकराचार्य विवाद बने इस्तीफे की वजह

अपने पांच पन्नों के इस्तीफे में अलंकार ने दो बड़े मुद्दों को प्रमुख कारण बताया—

  • UGC के नए नियम, जिन्हें उन्होंने सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य के लिए खतरा बताया

  • प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद, जिसे उन्होंने सांस्कृतिक अपमान करार दिया

प्रशासन पर गंभीर आरोप

अग्निहोत्री ने दावा किया कि उन्हें डीएम आवास पर जबरन बैठाए रखा गया और मानसिक दबाव डाला गया। उन्होंने लखनऊ से आए एक कथित फोन कॉल में जातिगत अपमान का भी आरोप लगाया।

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प्रशासन का जवाब: आरोप निराधार

जिला प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह के मुताबिक, यह केवल एक सामान्य प्रशासनिक बैठक थी, जहां उन्हें करियर को लेकर समझाइश दी गई। प्रशासन का कहना है कि बंधन या दबाव जैसी कोई स्थिति नहीं थी

सवालों के घेरे में प्रशासनिक अनुशासन

बिना चार्ज सौंपे अधिकारी का इस तरह गायब होना प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर आगे क्या कदम उठाते हैं

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