Dadhi News Retired Lecturer Abdul Sattar Khan Demise: सामाजिक समरसता के प्रतीक सेवानिवृत्त व्याख्याता अब्दुल सत्तार खान का निधन, दाढ़ी नगर में शोक

VIKASH KHALKHO

दाढ़ी [Nishanebaaz News]। Dadhi News Retired Lecturer Abdul Sattar Khan Demise के तहत नगर पंचायत दाढ़ी और आसपास के अंचल के लिए एक युग का अंत हो गया है। शिक्षा जगत के सम्मानित एवं मजबूत स्तंभ, सेवानिवृत्त व्याख्याता अब्दुल सत्तार खान साहब का आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की दुखद खबर फैलते ही पूरे दाढ़ी नगर सहित समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और हर वर्ग स्तब्ध रह गया।

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युवाओं के सच्चे मार्गदर्शक और रोजगार के संबल

अब्दुल सत्तार खान केवल एक समर्पित शिक्षक ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के होनहार युवाओं के सच्चे मार्गदर्शक भी थे। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान और सेवानिवृत्ति के पश्चात भी पढ़े-लिखे बेरोजगार नवयुवकों को मार्गदर्शन देकर आत्मनिर्भर बनाने में अतुलनीय योगदान दिया।

आज भी उनके सही मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग की बदौलत दर्जनों युवा विभिन्न स्थानों पर शिक्षक के पदों पर निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो उनकी शिक्षा और प्रेरणा की सबसे बड़ी अमर विरासत मानी जाती है।

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पीढ़ियों से जारी जनसेवा और अनुशासन की पारिवारिक विरासत

सत्तार खान साहब का परिवार शुरू से ही समाज सेवा और राष्ट्र सेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित रहा है। उनके दादाजी अंग्रेजी हुकूमत के दौर में पुलिस विभाग में हवलदार के पद पर तैनात थे, जबकि उनके पिताजी जनाब फिरासत खान भी क्षेत्र के एक बेहद सम्मानित और लोकप्रिय शिक्षक थे।

परिवार की इसी गौरवशाली शिक्षा, अनुशासन और लोकसेवा की सुदृढ़ परंपरा को अब्दुल सत्तार खान साहब ने जीवनपर्यंत आगे बढ़ाया और नए आयाम स्थापित किए।

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अंतिम विदाई बनी सर्वधर्म समभाव और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

अब्दुल सत्तार खान साहब की सबसे बड़ी और खास पहचान समाज में सामाजिक समरसता और भाईचारे के प्रतीक के रूप में थी। वे मुस्लिम समाज के साथ-साथ अन्य सभी समाजों में भी समान रूप से आदरणीय और सर्वमान्य थे। इसका प्रत्यक्ष और जीता-जागता दृश्य उनके जनाजे के दौरान देखने को मिला।

उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के कार्यक्रम में परिजनों और मुस्लिम समाज के लोगों से भी अधिक संख्या में अन्य सभी समाजों और वर्गों के नागरिक शामिल हुए। हर वर्ग और हर धर्म के लोगों की आंखें इस दुखद क्षण में नम थीं। स्थानीय मुस्लिम कब्रिस्तान में पूर्ण मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान मौजूद विशाल जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि दाढ़ी में इंसानियत, प्रेम और आपसी भाईचारा आज भी पूरी मजबूती से जिंदा है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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