Kerala CPIM Attack Congress: विड़िण्गम प्रोजेक्ट में ₹5400 करोड़ जनता के, लाभ अदाणी को क्यों? माकपा का तीखा हमला

Kerala CPIM Attack Congress: तिरुवनंतपुरम: केरल में विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह के प्रबंधन और नौकरशाही में हुए फेरबदल को लेकर राजनीतिक पारा अचानक बेहद गर्म हो गया है। राज्य के मुख्य विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सरकार पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। माकपा के वरिष्ठ नेता और कन्नूर जिला सचिव के. के. रागेश ने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की तेजतर्रार अधिकारी दिव्या एस. अय्यर को विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह के प्रबंध निदेशक (MD) पद से अचानक हटाए जाने का एकमात्र उद्देश्य उद्योगपति गौतम अदाणी के नेतृत्व वाले ‘अदाणी समूह’ को अनुचित लाभ पहुँचाना था। विपक्ष ने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन से इस हाई-प्रोफाइल तबादले के पीछे के वास्तविक कारणों को स्पष्ट करने की मांग की है।

हिस्सेदारी हस्तांतरण विवाद के बीच आया माकपा का बयान

यह पूरा राजनीतिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब बंदरगाह की रियायतधारक कंपनी ‘अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ (AVPPL) में अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की दिग्गज पोत परिवहन कंपनी ‘मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी’ (MSC) को हस्तांतरित करने के ‘अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड’ (APSEZ) के प्रस्ताव पर पहले से ही रार चल रही है। वामपंथी नेता के. के. रागेश का आरोप है कि तत्कालीन एमडी दिव्या एस. अय्यर ने विड़िण्गम बंदरगाह रियायत समझौते के मूल प्रावधानों में बदलाव करने के अदाणी समूह के प्रयासों का पुरजोर विरोध किया था और राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

मुख्यमंत्री की ‘विशेष विमान’ यात्रा पर भी खड़े किए सवाल

रागेश ने अपने फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि अदाणी समूह के अधिकारी लंबे समय से दिव्या अय्यर को इस पद से हटवाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने उन दबावों को खारिज करते हुए साफ कह दिया था कि सरकारी अधिकारियों के भविष्य का फैसला केवल सरकार करेगी। रागेश का आरोप है कि राज्य में सरकार बदलते ही इस महिला अधिकारी का स्थानीय स्वशासन विभाग में तबादला कर दिया गया और उनकी जगह एक ऐसे अधिकारी को नियुक्त कर दिया गया जिसे बंदरगाह प्रशासन का कोई पूर्व अनुभव नहीं है। इसके साथ ही, माकपा नेता ने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की हालिया मंगलुरु यात्रा पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि उनकी अदाणी समूह के अधिकारियों के साथ हुई गुप्त बैठक का खर्च और विशेष विमान (Private Jet) का भुगतान किसने किया?

निवेश और मुनाफे के आंकड़ों पर उठाए विधिक सवाल

माकपा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विड़िण्गम परियोजना में राज्य सरकार ने जनता के टैक्स के करीब 5,400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है, जबकि अदाणी समूह ने लगभग 2,400 करोड़ रुपये लगाए हैं। ऐसे में प्रस्तावित सौदे से कंपनी को 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा होने की उम्मीद है। रियायत समझौते के तहत किसी भी हिस्सेदारी के हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी विधिक रूप से आवश्यक है। माकपा ने पूछा है कि क्या सरकार इस प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के खिलाफ कोई कानूनी कदम उठाएगी या मूकदर्शक बनी रहेगी? इस पूरे मामले ने अब केरल की राजनीति में एक नए कॉरपोरेट-प्रशासनिक गठजोड़ के विवाद को जन्म दे दिया है।

Share The News
[youtube_shorts]

Popular News

CG Transfer Breaking : वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा फेरबदल, 21 कर्मचारियों का तबादला

CG Transfer Breaking :रायपुर। राज्य शासन के वाणिज्यिक कर...

Raipur Police Commissioner: IPS डॉ. संजीव शुक्ला ने संभाला पुलिस आयुक्त का पदभार… जानिए क्या कुछ कहा

Raipur Police Commissioner:रायपुर : रायपुर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के...

Related Articles

Popular Categories