Mukesh Tripathi ACB Raipur : रायगढ़ | 28 मार्च 2026 रायगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) पुनीत समीक्षा खलखो की अदालत ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए पुलिस विभाग के प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी और उनकी पत्नी पूनम त्रिपाठी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला पांच साल पुराने एक विवाद और पुलिस पद के दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसमें एक पीड़ित महिला मंजू अग्रवाल न्याय के लिए लगातार संघर्ष कर रही थी।
क्या है पूरा मामला? मामला 3 नवंबर 2020 का है, जब परिवादिनी मंजू अग्रवाल अपने पति को बुलाने के लिए कोतरा रोड स्थित सावित्री नगर में मुकेश त्रिपाठी के घर गई थीं। आरोप है कि वहां प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी और उनकी पत्नी पूनम ने मंजू के साथ न केवल अश्लील गाली-गलौज की, बल्कि उन्हें सार्वजनिक तौर पर अपमानित करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी।
पद का दुरुपयोग और प्रताड़ना पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद मुकेश त्रिपाठी ने अपने पद का रसूख दिखाते हुए उसी दिन सिटी कोतवाली में उल्टा मंजू अग्रवाल के खिलाफ ही कई धाराओं में मामला दर्ज करा दिया। जब पीड़िता ने कोतवाली में अपनी शिकायत दर्ज करानी चाही, तो पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। हार मानकर महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
न्यायालय का सख्त रुख अधिवक्ता सिराजुद्दीन की पैरवी और लंबी सुनवाई के बाद, न्यायालय ने माना कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 294, 506, 500, 511 और 34 के तहत मामला पंजीबद्ध करने का आदेश दिया है। वर्तमान में मुकेश त्रिपाठी रायपुर स्थित एसीबी (ACB) कार्यालय में पदस्थ हैं। अदालत ने दोनों आरोपियों को 16 अप्रैल 2026 को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किया है।
इस आदेश के बाद रायगढ़ पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर पुलिसकर्मियों द्वारा रसूख के दम पर आम नागरिकों को प्रताड़ित करने से जुड़ा है।











