निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में कलेक्टर से लेकर सचिव स्तर तक कई अहम जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इसे शासन व्यवस्था में तेजी और प्रभावशीलता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिल्पा गुप्ता हटाई गईं, जांच के बाद कार्रवाई
लोक शिक्षा विभाग में पदस्थ सचिव शिल्पा गुप्ता को उनके पद से हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग में 150 करोड़ रुपये की खरीदी से जुड़े मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इसके बाद टेंडर निरस्त किया गया और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
भोपाल कलेक्टर बदले, प्रियंक मिश्रा को जिम्मेदारी
इस फेरबदल में भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। साथ ही उन्हें नगर एवं ग्राम निवेश विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। वहीं धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को भोपाल का नया कलेक्टर बनाया गया है।
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रीवा, सागर और नर्मदापुरम में बदलाव
राज्य के कई संभागों में भी अहम बदलाव किए गए हैं। नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को बैतूल से रीवा कलेक्टर बनाया गया है, जबकि प्रतिभा पाल को रीवा से सागर भेजा गया है। सोमेश मिश्रा को मंडला से नर्मदापुरम कलेक्टर और सोनिया मीना को वित्त विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
अन्य जिलों में नए कलेक्टर नियुक्त
अन्य तबादलों के तहत राजीव रंजन मीना को धार, अमित वर्मा को शिवपुरी, राखी सहाय को उमरिया और शैला दहिया को श्योपुर का कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा विदिशा मुखर्जी को मंडला, प्रताप सिंह यादव को दमोह, राहुल नामदेव पाटे को मंडला, डॉ. गोविंद कुमार भार्गव को झाबुआ और डॉ. संजय कुमार सोनवणे को बैतूल का कलेक्टर नियुक्त किया गया है।
सचिव स्तर पर भी बदलाव
सरकार ने कई अधिकारियों को सचिव और अपर सचिव स्तर पर नई जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। अभिषेक सिंह को लोक शिक्षा आयुक्त, धरणेन्द्र कुमार जैन को विमानन विभाग में अपर सचिव और रवीन्द्र कुमार चौधरी को नर्मदा घाटी विकास विभाग में अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अन्य अधिकारियों को भी विभिन्न विभागों में नई भूमिकाएं सौंपी गई हैं।
शासन व्यवस्था को गति देने की कोशिश
सरकार का मानना है कि इस बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार होगा और विकास कार्यों की मॉनिटरिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। यह कदम शासन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।











