Mojo-Mushroom Factory : रायपुर : रायपुर के खरोरा में मोजो मशरूम फैक्ट्री में बाल श्रमिकों के शोषण का मामला सामने आया था, जिसमें 17 नवंबर को 109 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इसमें 68 बच्चियां और 41 बच्चे शामिल थे। बावजूद इसके, 28 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है और दोषियों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।
Mojo-Mushroom Factory : पुलिस अधिकारियों के अनुसार रेस्क्यू करने वाली एनजीओ टीम अभी तक बयान दर्ज कराने उपस्थित नहीं हुई है। एनजीओ का दावा है कि दस्तावेज थाने में 17 दिसंबर को जमा कर दिए गए थे, लेकिन कार्रवाई अभी तक नहीं हुई।
Mojo-Mushroom Factory : रेस्क्यू किए गए बच्चों ने बताया कि उन्हें एक कमरे में 10-15 बच्चों के साथ रखा जाता था और उनके साथ मारपीट होती थी। उन्हें सुबह 4-5 बजे उठाकर देर रात तक काम करवाया जाता था और खाना केवल दो बार दिया जाता था। कुछ बच्चों को जुलाई में भी बचाया गया था, लेकिन फिर से फैक्ट्री में काम के लिए लाया गया।
Mojo-Mushroom Factory : बच्चों को काम के दौरान केमिकल के संपर्क में रखा गया। टीम ने बताया कि फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाला फॉर्मोलिन जहरीला था और लंबे समय तक संपर्क में रहने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे कैंसर, हो सकती थीं। फैक्ट्री का असली नाम मारूति फ्रेश फर्म है, जिसे खरोरा इलाके में मोजो मशरूम के नाम से जाना जाता है। इस फैक्ट्री में लगभग 100 श्रमिक काम कर रहे थे।
Mojo-Mushroom Factory : एवीए (एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन) ने फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ शिकायत दी है और यह शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, रायपुर कलेक्टर, एसएसपी, महिला एवं बाल विकास विभाग और नई दिल्ली स्थित एवीए निदेशक को भेजी गई है।
Mojo-Mushroom Factory : रायपुर के नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) वीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि मामले में जांच चल रही है। श्रम और बाल आयोग से दस्तावेज मांगे गए हैं और रेस्क्यू टीम व बच्चों के बयानों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





