Sunday, August 16, 2026
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Assembly session : बच्चों में स्मार्टफोन की लत पर विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय ने जताई चिंता, ‘नो गैजेट ज़ोन’ बनाने पर दिया ज़ोर

Assembly session : भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन, जबलपुर उत्तर मध्य विधानसभा से विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से बच्चों में स्मार्टफोन और इंटरनेट के अनियंत्रित उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर पड़ रहे इसके प्रतिकूल प्रभावों और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों को लेकर सदन में प्रश्न किया।

Assembly session : प्रधानमंत्री मोदी की ‘मन की बात’ से मिली प्रेरणा

विधायक डॉ. पाण्डेय ने अपने प्रश्न की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ‘मन की बात’ कार्यक्रम से मिलने की बात कही, जहाँ प्रधानमंत्री ने परिवार में “नो गैजेट जोन” बनाने और पारिवारिक संवाद पर ज़ोर दिया था।

उन्होंने सदन को बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्मार्टफोन की लत उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और नैतिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।

Assembly session : डिजिटल निर्भरता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

विधायक डॉ. पाण्डेय ने विशेषज्ञों की चेतावनी का हवाला देते हुए कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों में निम्न समस्याओं को जन्म दे रहा है:

  • एकाग्रता और स्मरण शक्ति में गिरावट।

  • दृष्टि, नींद और व्यावहारिक संतुलन पर प्रतिकूल असर।

  • डिजिटल निर्भरता, चिड़चिड़ापन और सामाजिक अलगाव।

  • सीखने की क्षमता में कमी और अवसाद।

उन्होंने चिंता जताई कि बच्चे इंटरनेट की अनियंत्रित उपलब्धता के कारण अश्लील सामग्री और आयु के अनुपयुक्त गेम्स तक आसानी से पहुँच रहे हैं, जो उनके मूल्य बोध और चारित्रिक विकास पर गंभीर संकट उत्पन्न कर रहा है।

Assembly session : विधायक ने मांग की कि सरकार विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और समुदाय स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान, अभिभावक परामर्श कार्यक्रम, डिजिटल साक्षरता और स्कूलों में स्मार्टफोन उपयोग पर स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करे, ताकि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके।

Assembly session : मंत्री निर्मला भूरिया का जवाब: कानूनी प्रावधान और जागरूकता जारी

विधायक के प्रश्न का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को अत्यंत गंभीरता से ले रही है।

मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा कई कानूनी और नीतिगत उपाय किए गए हैं :

  • कानूनी प्रावधान: किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत ऑनलाइन उत्पीड़न और साइबर अपराध से बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान लागू हैं।
  • सामूहिक निगरानी: माता-पिता, विद्यालयों, बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण इकाई को बच्चों के डिजिटल उपयोग पर सामूहिक निगरानी रखने के लिए निर्देशित किया गया है।
  • जागरूकता कार्यक्रम: आंगनबाड़ी केंद्रों, विद्यालयों और सामुदायिक स्तर पर साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
  • स्कूलों के लिए मॉड्यूल: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के साथ मिलकर कक्षा 6 से 10 के विद्यार्थियों के लिए ‘उमंग मॉड्यूल’ विकसित किया है, जिसमें डिजिटल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के बारे में जागरूकता भी शामिल है।

मंत्री भूरिया ने सदन को यह भी बताया कि बच्चों के स्क्रीन टाइम नियंत्रण और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षा एवं गृह विभाग के साथ समन्वय कर और अधिक ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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