Kuldeep Singh Sengar : नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उन्नाव कस्टोडियल डेथ केस में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को तगड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने सेंगर द्वारा दायर ‘सजा निलंबन’ (Suspension of Sentence) की याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला साल 2018 में उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
कुलदीप सिंह सेंगर ने अपनी याचिका में खराब स्वास्थ्य, डायबिटीज और आंखों की गंभीर बीमारी (रेटिना डिटैचमेंट) का हवाला देते हुए तिहाड़ जेल से बाहर एम्स (AIIMS) में इलाज कराने की अनुमति और अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित करने की मांग की थी। सेंगर की दलील थी कि वह लंबे समय से जेल में बंद हैं और उन्हें मानवीय आधार पर राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, सीबीआई (CBI) और पीड़िता के वकीलों ने इस अर्जी का पुरजोर विरोध किया।
सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी कि यह अपहरण, मारपीट और हिरासत में मौत जैसे अत्यंत गंभीर अपराधों का मामला है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि सेंगर ने पीड़िता के परिवार को डराने और न्याय प्रक्रिया को बाधित करने के लिए अपनी ताकत का दुरुपयोग किया था। पीड़िता की ओर से भी कहा गया कि सेंगर जैसे प्रभावशाली व्यक्ति को जेल से बाहर आने देने पर न्याय की गरिमा को ठेस पहुंचेगी।
न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा को फिलहाल निलंबित नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि कुलदीप सेंगर पहले से ही उन्नाव बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके बलात्कार मामले में मिली अंतरिम राहत पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के इस ताज़ा फैसले के बाद सेंगर की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।











