Tuesday, August 18, 2026
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Kawasi Lakhma Released Raipur Jail : कवासी लखमा की 379 दिन बाद घर वापसी: रायपुर जेल से हुए रिहा, समर्थकों ने फूल-मालाओं से लादा

Kawasi Lakhma Released Raipur Jail : रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा बुधवार को जेल से रिहा हो गए। उनकी रिहाई के समय जेल परिसर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की भारी भीड़ मौजूद थी। लखमा ने बाहर निकलते ही सबसे पहले गांधी मैदान पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

पत्नी का भावुक बयान

मीडिया से बातचीत में लखमा की पत्नी बुधरी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, “इतने दिनों तक वे जेल में रहे, मैं तो उनकी रिहाई के बारे में सोच-सोचकर दुबली हो गई थी। खाना-पीना तक छूट गया था। आज उन्हें बाहर देखकर बहुत सुकून मिल रहा है।”

सुप्रीम कोर्ट की ED को सख्त चेतावनी

लखमा की रिहाई का रास्ता तब साफ हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि आखिर ऐसी कौन सी जांच है जो साल भर बाद भी पूरी नहीं हो रही है? अदालत ने जांच अधिकारी से ‘पर्सनल एफिडेविट’ मांगते हुए पूछा कि आरोपी को कब तक जेल में रखेंगे।

जमानत की 4 प्रमुख शर्तें:

कोर्ट ने राहत तो दी है, लेकिन लखमा पर कुछ कड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं:

  1. राज्य से बाहर: लखमा को छत्तीसगढ़ की सीमा से बाहर रहना होगा। वे केवल कोर्ट पेशी के समय ही राज्य में आ सकेंगे।

  2. पासपोर्ट जमा: उन्हें अपना पासपोर्ट संबंधित अदालत में जमा करना होगा।

  3. पता और संपर्क: उन्हें अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराना अनिवार्य है।

  4. सहयोग: जांच एजेंसी जब भी बुलाएगी, उन्हें सहयोग करना होगा।

ED के आरोप: क्या था मामला?

ED का दावा है कि 2,100 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में लखमा ‘सिंडिकेट’ के मुख्य किरदारों में से एक थे।

  • 72 करोड़ का आरोप: ED का आरोप है कि लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपये कमीशन मिलता था। 36 महीनों में उन्हें 72 करोड़ रुपये मिले, जिसका उपयोग बेटे के घर और सुकमा में कांग्रेस भवन बनाने में किया गया।

  • नीतिगत बदलाव: आरोप है कि लखमा के इशारे पर ही ‘FL-10 लाइसेंस’ की शुरुआत हुई और अवैध शराब (पार्ट B) को सरकारी दुकानों से बेचा गया।

भविष्य की राह: कवासी लखमा की रिहाई कांग्रेस के लिए बस्तर संभाग में एक बड़ा नैतिक बल है, हालांकि राज्य से बाहर रहने की शर्त उनके राजनीतिक कामकाज के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

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