इंदौर: मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाले इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भागीरथपुरा इलाके में जहरीला पानी पीने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 201 मरीज अभी भी निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना ने न सिर्फ विपक्ष को हमला करने का मौका दिया है, बल्कि सत्ताधारी बीजेपी के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
उमा भारती का तीखा हमला
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लगातार पोस्ट कर मोहन यादव सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने लिखा कि साल 2025 के अंत में हुई यह घटना प्रदेश, सरकार और पूरी व्यवस्था को “शर्मिंदा और कलंकित” कर गई है। उमा भारती ने सवाल उठाया कि जिस शहर को सबसे स्वच्छ माना जाता है, वहां गंदगी और जहर मिला पानी लोगों की जान कैसे ले रहा है।
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‘यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी’
उमा भारती ने कहा कि मृतकों के परिजनों को मिलने वाली 2 लाख रुपये की सहायता किसी भी जिंदगी की कीमत नहीं हो सकती। उन्होंने दोषियों को नीचे से ऊपर तक चिन्हित कर अधिकतम दंड देने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की बात कही। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव की नेतृत्व परीक्षा करार दिया।
महापौर पर भी साधा निशाना
एक अन्य पोस्ट में उमा भारती ने इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि अगर उनकी नहीं चली तो वे पद पर बने रहकर बोतलबंद पानी क्यों पीते रहे और जनता के बीच क्यों नहीं उतरे।
प्रशासनिक कार्रवाई और स्थिति
पानी के सैंपलों में ई-कोलाई और शिगेला बैक्टीरिया पाए गए हैं, जिससे हैजा फैलने की आशंका जताई जा रही है। सरकार ने तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।











