Wednesday, August 26, 2026
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Hanumana Forest Destruction : करोड़ों के राजस्व की चपत: पहाड़ों को निगल रहा अवैध खनन का काला साम्राज्य, सांसद ने दी कड़ी चेतावनी

Hanumana Forest Destruction : मऊगंज (24 फरवरी 2026): मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज में अवैध उत्खनन का खेल अब खूनी संघर्ष और खुलेआम गुंडागर्दी में बदल चुका है। जिले के हनुमना क्षेत्र के लोढ़ी सहित दर्जनों गांवों में माफियाओं ने एनजीटी (NGT) और सरकार के तमाम नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ों को छलनी कर दिया है। यहाँ से रोजाना सैकड़ों ट्रक पत्थर की चीप, पटिया और ढोका उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं में खपाए जा रहे हैं।

मीडिया टीम पर हमला: माफियाओं के बुलंद हौसले अवैध खनन की पड़ताल करने जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा भयावह था। भारी मशीनों से पहाड़ों को चीरा जा रहा था। टीम को देखते ही मशीनें हटाकर लोग भागने लगे, लेकिन कुछ ही देर में संगठित माफिया गिरोह ने मीडिया टीम को घेर लिया। टीम के साथ न केवल झूमाझटकी की गई, बल्कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए वहां से भागना पड़ा। यह घटना साबित करती है कि मऊगंज के कुछ क्षेत्रों में कानून का नहीं, बल्कि माफियाओं का सिक्का चल रहा है।

सांसद का सख्त रुख, कलेक्टर से शिकायत इस सनसनीखेज मामले पर रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र में किसी भी तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को उनकी सही जगह भेजा जाएगा। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता बीके माला ने इस मामले की शिकायत मऊगंज कलेक्टर से लेकर रीवा कमिश्नर तक की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद खनिज और वन विभाग की चुप्पी संदिग्ध है, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

पर्यावरण और आदिवासियों पर संकट अवैध खनन के कारण जंगल उजड़ रहे हैं और पहाड़ गहरी खाइयों में तब्दील हो गए हैं। इसका सीधा असर पर्यावरण और स्थानीय आदिवासी समुदायों पर पड़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि मशीनों के शोर और धूल से उनका प्राकृतिक जीवन दूभर हो गया है, लेकिन माफियाओं के डर से प्रशासन भी उनकी सुध नहीं ले रहा है।

प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया (बाइट):

  • जनार्दन मिश्रा (सांसद): “क्षेत्र में गुंडागर्दी नहीं चलेगी, प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।”

  • संजय जैन (कलेक्टर, मऊगंज): “पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

  • बीके माला (अधिवक्ता): “बिना अनुमति पहाड़ों का सीना चीरा जा रहा है, यह शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाने का संगठित खेल है।”

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