General MM Naravane Book Controversy : सेना अधिकारियों के किताब लिखने पर पाबंदी नहीं, लेकिन नियमों में होगा बदलाव; रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी सफाई

VIKASH KHALKHO

General MM Naravane Book Controversy : नई दिल्ली (22 फरवरी 2026): पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब को लेकर जारी चर्चाओं के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना के अधिकारियों पर रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। रक्षा मंत्री ने उन अटकलों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार रिटायरमेंट के बाद लिखने के लिए ’20 साल का कूलिंग ऑफ पीरियड’ अनिवार्य करने जा रही है।सैन्य अधिकारियों के किताब लिखने पर रोक नहीं, लेकिन नई गाइडलाइन जारी कर सकती है सरकार

नई गाइडलाइन की तैयारी में मंत्रालय हालांकि, रक्षा मंत्री के बयान के साथ ही सूत्रों ने संकेत दिया है कि रक्षा मंत्रालय वेटरन्स (पूर्व सैनिकों) के लिए नई गाइडलाइन जारी करने पर काम कर रहा है। इसके तहत सेना से जुड़े अनुभवों या ऑपरेशन्स पर आधारित किताब लिखने से पहले रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेना अनिवार्य हो सकता है। नए नियमों में स्पष्ट किया जाएगा कि यदि कोई अधिकारी बिना अनुमति संवेदनशील जानकारी प्रकाशित करता है, तो उसके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।Latest and Breaking News on NDTV

क्या है जनरल नरवणे की किताब का विवाद? विवाद की मुख्य वजह पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ है। प्रकाशक और लेखक के अनुसार यह किताब अभी छपी नहीं है और रक्षा मंत्रालय के पास ‘क्लियरेंस’ के लिए लंबित है। इसके बावजूद, यह किताब हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पास देखी गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में केस भी दर्ज किया है।

ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का पालन अनिवार्य सूत्रों के मुताबिक, भले ही कोई अधिकारी रिटायर हो जाए, लेकिन ‘आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम’ (Official Secrets Act) उन पर जीवन भर लागू रहता है। किसी भी सैन्य अभियान, हथियारों की क्षमता या खुफिया जानकारी को सार्वजनिक करना राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ माना जाता है। वर्तमान में सेवा दे रहे सैनिकों के लिए नियम और भी सख्त हैं, जिन्हें किसी भी लेख या किताब के लिए लिखित पूर्व अनुमति लेनी पड़ती है।Latest and Breaking News on NDTV

अधिकारियों की राय सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यदि नई गाइडलाइन आती है, तो इसे केवल सेना तक सीमित न रखकर सभी सरकारी विभागों के उच्च अधिकारियों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। फिलहाल, रक्षा मंत्रालय इन नियमों को अंतिम रूप देने के लिए आंतरिक चर्चा कर रहा है ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे।

Share The News
Share This Article
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *