मुंबई (विकास खलखो) [Nishanebaaz News] Anjali Arora As Sita Ramayan। एक तरफ जहां नितेश तिवारी के निर्देशन और रणबीर कपूर के अभिनय से सज रही पौराणिक फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों में भारी उत्सुकता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर भगवान राम के जीवन चरित्र पर आधारित एक और फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ का टीजर आउट कर दिया गया है। हालांकि, टीजर सामने आते ही इस फिल्म की स्टारकास्ट और कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
अंजलि अरोड़ा को माता सीता के रूप में देख भड़के दर्शक
फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में अभिनेता देव शर्मा भगवान श्री राम की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जबकि टिकटॉक और ‘कच्चा बादाम’ गाने से रातों-रात मशहूर हुईं अंजलि अरोड़ा को माता सीता के पावन किरदार में ढाला गया है। जैसे ही निर्माताओं द्वारा इस फिल्म का टीजर सार्वजनिक किया गया, अंजलि अरोड़ा की कास्टिंग को लेकर नेटिज़न्स ने तीखा विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया। उपयोगकर्ताओं का तर्क है कि माता सीता का चरित्र गरिमा, पवित्रता और असीम संवेदनशीलता का प्रतीक है, जिसे महज प्रचार (पब्लिसिटी) पाने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
View this post on Instagram
टीजर के दृश्यों और मंत्र पर मेकर्स की बड़ी चूक उजागर
जारी किए गए टीजर की शुरुआत सीता स्वयंवर के दृश्य से होती है, जिसमें श्री राम और माता सीता एक-दूसरे को वरमाला पहनाते हैं। इसके पश्चात श्री राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास गमन के भावुक दृश्यों को पिरोया गया है। टीजर के अंत में रावण से संवाद करते हुए अंजलि अरोड़ा का डायलॉग गूंजता है, “सीता सिर्फ राम की है रावण! या तो सीता अपने स्वामी के साथ जाएगी या वियोग में अपने प्राण त्याग देगी।” हालांकि, इस भावुक दृश्य के पृष्ठभूमि में मेकर्स ने ‘कृष्णाय वासुदेवाय हरये…’ मंत्र का प्रयोग कर दिया। दर्शकों ने तुरंत इस ऐतिहासिक कालानुक्रमिक भूल को पकड़ लिया और सवाल उठाया कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम के कालखंड में द्वापरयुग के श्री कृष्ण से जुड़े मंत्र का प्रयोग कैसे संभव है।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और सनातन आस्था का सवाल
टीजर के सामने आने के बाद से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तीखी बहस छिड़ गई है। अधिकांश नेटिजन्स इसे सनातन आस्था और पूजनीय पौराणिक पात्रों के साथ खिलवाड़ करार दे रहे हैं। उपयोगकर्ताओं का कहना है कि निर्माताओं को धार्मिक और पौराणिक फिल्मों के निर्माण के समय सही पात्र चयन (कास्टिंग) और वैज्ञानिक/ऐतिहासिक तथ्यों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।





