Friday, August 14, 2026
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District Hospital Scam : सांसद के निरीक्षण में खुली पोल: क्रिटिकल केयर यूनिट बनने से पहले ही डकार गए लाखों रुपये!

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District Hospital Scam : बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से स्वास्थ्य विभाग को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला अस्पताल में ‘क्रिटिकल केयर यूनिट’ की स्थापना के नाम पर करीब 26 लाख रुपये से अधिक के कथित भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यूनिट के शुरू होने से पहले ही सामानों की खरीदी में बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमतें दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है।

इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश उस समय हुआ जब क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल जिला अस्पताल के औचक निरीक्षण पर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान जब सांसद ने खरीदी से जुड़े दस्तावेजों और वहां मौजूद उपकरणों का मिलान किया, तो कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर पाया गया। सांसद ने मौके पर ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेंद्र वर्मा पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। पाटिल ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मामले की उच्च स्तरीय विशेष जांच कराई जाएगी।

मामले में नया मोड़ तब आया जब जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोसेस ने सीधे तौर पर CMHO डॉ. राजेंद्र वर्मा को इस गड़बड़ी का जिम्मेदार ठहराया। डॉ. मोसेस ने मीडिया के सामने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि जिस खरीदी को 26 लाख रुपये का बताया जा रहा है, उसकी वास्तविक कीमत 6 लाख रुपये भी नहीं है। उन्होंने भ्रष्टाचार का उदाहरण देते हुए बताया कि एक टॉर्च, जिसकी बाजार में कीमत मात्र 22 रुपये है, उसे दस्तावेजों में 1000 रुपये का दर्शाया गया है।

सिविल सर्जन के इन आरोपों ने विभाग के भीतर चल रही खींचतान और कमीशनखोरी को सार्वजनिक कर दिया है। डॉ. मोसेस के अनुसार, खरीदी की प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर चहेते वेंडरों को लाभ पहुंचाया गया है। इधर, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने चेतावनी दी है कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस प्रशासनिक उठापटक के बीच राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रविंद्र महाजन ने इस घोटाले को लेकर राज्य सरकार को घेरा है। महाजन ने आरोप लगाया कि यह भ्रष्टाचार सरकार की नाक के नीचे हो रहा है और यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता है। उन्होंने मांग की है कि जांच निष्पक्ष हो और घोटाले की राशि की वसूली संबंधित अधिकारियों से की जाए।

फिलहाल, बुरहानपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्य विभाग में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रोजेक्ट, जिसका उद्देश्य गंभीर मरीजों की जान बचाना था, अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि सांसद की घोषणा के बाद जांच कमेटी कब तक गठित होती है और क्या ₹22 की टॉर्च को ₹1000 में खरीदने वाले दोषियों पर कानून का डंडा चलता है।

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