Sunday, August 16, 2026
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Kerala Elections 2026 : केरल में त्रिकोणीय मुकाबला : लेफ्ट की चुनौती, कांग्रेस की कोशिश और BJP की अग्निपरीक्षा

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Kerala Elections 2026 : नई दिल्ली। केरल में अगले साल होने वाले 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहे स्थानीय निकाय चुनाव को सियासी गलियारों में ‘सेमीफाइनल’ और ‘लिटमस टेस्ट’ कहा जा रहा है। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि राज्य में सत्तारूढ़ सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ, कांग्रेस के अगुवाई वाले यूडीएफ और बीजेपी वाले एनडीए के बीच यह लड़ाई त्रिकोणीय रूप ले चुकी है। निकाय चुनाव के नतीजे सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा और प्रमुख गठबंधनों के सियासी समीकरणों को प्रभावित करेंगे।

केरल का निकाय चुनाव कैसे बन गया त्रिकोणीय (Photo-ITG)

Kerala Elections 2026 :  इस निकाय चुनाव में तीनों प्रमुख गठबंधनों के लिए यह किसी अग्रिपरीक्षा से कम नहीं है। वामपंथी मोर्चा (एलडीएफ) के सामने अपने एकमात्र बचे हुए गढ़—केरल—के प्रभुत्व को बचाए रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन खुद मैदान में मोर्चा संभाले हुए हैं और नई कल्याणकारी योजनाओं के जरिए कार्यकर्ताओं के उत्साह को बढ़ाना चाहते हैं, ताकि 2026 के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया जा सके। वहीं, कांग्रेस (यूडीएफ) के लिए यह अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यूडीएफ निकाय चुनाव जीतकर 2026 में सत्ता में वापसी की मजबूत आधारशिला रखना चाहता है और अपने उन पारंपरिक मतदाताओं को दोबारा जोड़ना चाहता है, जिनका एक हिस्सा खिसककर बीजेपी की ओर चला गया है।

Kerala Elections 2026 : तीसरा प्रमुख खिलाड़ी बीजेपी (एनडीए) इस चुनाव के जरिए केरल में अपनी सियासी जड़ें जमाना चाहती है। बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित की है, जहाँ उसने शहर के मध्यम वर्ग और उच्च जाति समुदायों के बीच अपना आधार मजबूत किया है। पार्टी यह साबित करना चाहती है कि शहरी क्षेत्रों में उसकी बढ़त महज एक क्षणिक उछाल नहीं है। पार्टी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर व्यक्तिगत रूप से अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि सबरीमाला विवाद और सोने की तस्करी जैसे मुद्दे, जिन्होंने एलडीएफ सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है, उसे राज्य में एक नई उम्मीद दिखा सकते हैं।

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केरल में स्थानीय निकाय चुनाव दो चरणों में—9 और 11 दिसंबर को हो रहे हैं। पहले चरण में कोल्लम, तिरुवनंतपुरम, पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, इडुक्की, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, कन्नूर, कासरगोड और वायनाड जिले में वोटिंग होगी। राज्य के 1200 स्थानीय निकायों में से 1,199 में चुनाव हो रहे हैं, जिसमें 941 ग्राम पंचायतें, 152 ब्लॉक पंचायतें, 14 जिला पंचायतें, 86 नगरपालिकाएं और छह निगम शामिल हैं, जिनके कुल 23,576 वार्डों के लिए चुनाव होना है।

Kerala Elections 2026 : कुल मिलाकर, ये स्थानीय चुनाव महज स्थानीय शासन की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि ये तीनों प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों के लिए 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने-अपने जनाधार, रणनीति और संगठन की ताकत को परखने का एक निर्णायक मौका हैं। यह चुनाव तय करेगा कि वामपंथी मोर्चा अपने दुर्ग को बचाने में कितना सफल होता है, कांग्रेस अपनी खोई हुई प्रासंगिकता वापस ला पाती है, या फिर बीजेपी केरल की राजनीति में एक मजबूत तीसरे ध्रुव के रूप में उभरकर आती है।

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