Thursday, August 27, 2026
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CG NEWS: सारंगढ़ वन विभाग में प्रशिक्षण घोटाला उजागर?….8 लाख का बजट… प्रशिक्षार्थी ZERO… अधिकारी मौन!.

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CG NEWS: गौरी शंकर घरघोड़ा /सारंगढ़। विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार के वन विभाग द्वारा बांस शिल्पकला एवं प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू करने का दावा किया गया है। लिमगांव में करीब 8 लाख रुपये की लागत से 45 दिनों का यह प्रशिक्षण 3 नवंबर से शुरू होना बताया जा रहा है, लेकिन जमीन पर स्थिति बिल्कुल उलट है। प्रशिक्षण शुरू हुए 15 दिन बीत चुके हैं, बावजूद इसके प्रशिक्षण केंद्र पर एक भी प्रशिक्षार्थी मौजूद नहीं मिला।

 

 

CG NEWS: मौके पर केवल तीन लोग मौजूद थे, जो खुद को प्रशिक्षक बता रहे थे। इन प्रशिक्षकों के पास न तो दर्ज प्रशिक्षार्थियों की सूची थी, न उपस्थिति रजिस्टर, और न ही किसी प्रकार के दस्तावेज़, जो प्रशिक्षण के विधिवत संचालन को साबित कर सकें। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूरा प्रशिक्षण कार्यक्रम कागज़ों में चल रहा है, जबकि वास्तविकता में प्रशिक्षार्थियों के नाम पर बजट खपत का गंभीर फर्जीवाड़ा नजर आ रहा है।

 

CG NEWS: जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया भी संदिग्ध पाया गया। एसडीओ वन विभाग ने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से इनकार किया और केवल जांच करवाने की औपचारिक बात दोहराई। जब उनसे पूछा गया कि पिछले 15 दिनों में प्रशिक्षण स्थल की जांच के लिए कौन-कौन से अधिकारी गए और क्या रिपोर्ट मिली, तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली। वहीं, डीएफओ ने जानकारी देने से साफ बचते हुए सिर दर्द का बहाना बना लिया, जिससे मामले की गंभीरता और भी बढ़ जाती है।

 

 

CG NEWS: स्थानीय लोगों का आरोप है कि सारंगढ़ वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी प्रशिक्षार्थियों के नाम पर जारी बजट को हड़पने की साजिश में लगे हुए हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य समुदाय को आजीविका से जोड़ना था, लेकिन कथित भ्रष्टाचार इस उद्देश्य को ठेंगा दिखाता हुआ प्रतीत हो रहा है। बिना प्रशिक्षार्थियों के 15 दिन तक प्रशिक्षण दिखाना, कागज़ी रिकॉर्ड तैयार करना और जनता के पैसे की लूट—यह सब एक संगठित भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है।

CG NEWS: यह पूरा मामला पारदर्शिता और निगरानी की भारी कमी को उजागर करता है। अगर सरकार सच में जनजातीय विकास और आजीविका उन्नयन को लेकर गंभीर है, तो इस कागज़ी प्रशिक्षण और बजट की संभावित हेराफेरी की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और पूरे प्रकरण का खुला खुलासा ही इस घोटाले पर रोक लगा सकता है।

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