Tuesday, October 6, 2026
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CG News: एक शहर, रावण दहन के दो मैदान और 20 लाख का टेंडर! बिलासपुर में दशहरे से पहले क्यों छिड़ा विवाद?

Bilaspur Ravan Dahan Controversy: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- दशहरा से पहले बिलासपुर में रावण दहन को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। साइंस कॉलेज मैदान में दशहरा उत्सव की तैयारियों के लिए नगर निगम के जोन क्रमांक-7 से करीब 20 लाख रुपये का टेंडर जारी होने के बाद मामला गरमा गया। विवाद के बीच महापौर पूजा विधानी ने साफ कहा है कि साइंस कॉलेज में होने वाले रावण दहन से नगर निगम का कोई संबंध नहीं होगा। उनके मुताबिक निगम का आधिकारिक दशहरा उत्सव और रावण दहन पुलिस ग्राउंड में ही आयोजित किया जाएगा।

साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन को लेकर बिलासपुर में पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक खींचतान होती रही है। पिछले साल यहां दो रावण जलाए जाने को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। अब इस बार जोन क्रमांक-7 से 19.96 लाख रुपये का टेंडर सामने आने के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।जोन कार्यालय के अनुसार, साइंस कॉलेज में दशहरा उत्सव के लिए निविदा कलेक्टर कार्यालय के निर्देश पर जारी की गई है। आयोजन के लिए सीएसआर मद से राशि खर्च किए जाने की बात कही गई है।

कांग्रेस ने टेंडर और सीएसआर राशि पर उठाए सवाल
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि 28 सितंबर को निविदा जारी की गई थी और अगले ही दिन इसे रद्द कर दिया गया। कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि नगर निगम खुद सीएसआर राशि उपलब्ध नहीं कराता, ऐसे में साइंस कॉलेज के आयोजन के लिए राशि कहां से आएगी।मिश्रा के मुताबिक एसईसीएल से जानकारी लेने पर भी ऐसी राशि उपलब्ध कराने की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने करीब 20 लाख रुपये खर्च करने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए शहर के दूसरे दशहरा मैदानों को भी आयोजन के लिए सहयोग देने की मांग की।

मेयर ने कहा- निगम का सिर्फ एक रावण जलेगा
महापौर पूजा विधानी ने साइंस कॉलेज में नगर निगम की ओर से रावण दहन कराने से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें जोन क्रमांक-7 से टेंडर जारी होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद जोन कमिश्नर को जरूरी निर्देश दिए गए हैं।महापौर के अनुसार नगर निगम साइंस कॉलेज के आयोजन की एजेंसी नहीं बनेगा और न ही वहां निगम की कोई भूमिका होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम की ओर से आधिकारिक दशहरा उत्सव पुलिस ग्राउंड में होगा और वहीं रावण दहन कराया जाएगा।
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जोन अधिकारी बोले- कलेक्टर के निर्देश पर निकला टेंडर
जोन क्रमांक-7 के अधिकारी भूपेंद्र उपाध्याय ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर 28 और 29 सितंबर को टेंडर जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि साइंस कॉलेज में दशहरा उत्सव सीएसआर मद से आयोजित किया जाना है।वहीं नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने कहा कि टेंडर जोन कार्यालय की ओर से जारी किया गया है और वह पूरे मामले की जानकारी लेंगे। इस बयान के बाद टेंडर प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

आतिशबाजी से लेकर पुतले तक, ऐसे बांटा गया 19.96 लाख का बजट
जोन-7 की निविदा में साइंस कॉलेज मैदान में दशहरा उत्सव की अलग-अलग व्यवस्थाओं के लिए राशि तय की गई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा टेंट और बैठक व्यवस्था के लिए रखा गया है।

  • टेंट और बैठक व्यवस्था: 9.96 लाख रुपये
  • आतिशबाजी: 4 लाख रुपये
  • पुतला निर्माण, प्रकाश और साउंड सिस्टम समेत अन्य व्यवस्था: 6 लाख रुपये
  • कुल निविदा राशि: 19.96 लाख रुपये

यानी केवल रावण दहन ही नहीं, बल्कि पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है।

अरपांचल में सरकारी रावण दहन से अलग निगम की मांग तेज
इसी बीच अरपा नदी के पार बसे अरपांचल क्षेत्र में पहली बार शासकीय स्तर पर रावण दहन का आयोजन होने जा रहा है। इस आयोजन को लेकर पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने अरपांचल के लिए अलग नगर निगम की पुरानी मांग फिर उठा दी है।

केशरवानी का कहना है कि जब अरपांचल शासकीय आयोजन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है, तो यहां के लोगों को अलग प्रशासनिक पहचान देने की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम के 70 वार्डों में से 24 वार्ड अरपांचल क्षेत्र में आते हैं।उनके मुताबिक सड़क, नाली, जलनिकासी, सफाई, यातायात और जलभराव जैसी समस्याएं अब भी क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अरपांचल में एसईसीएल मुख्यालय और अपोलो अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं, इसलिए क्षेत्र की प्रशासनिक पहचान और सुविधाओं को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है।

दशहरे से पहले बढ़ा सियासी तापमान
बिलासपुर में रावण दहन का विवाद सिर्फ आयोजन स्थल तक सीमित नहीं है। करीब 20 लाख रुपये की निविदा, सीएसआर मद से खर्च, टेंडर जारी होने और फिर उसे रद्द किए जाने के आरोपों ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब महापौर के साइंस कॉलेज आयोजन से निगम को अलग करने के बयान के बाद यह देखना अहम होगा कि वहां प्रस्तावित कार्यक्रम किस स्तर पर और किस व्यवस्था के तहत आयोजित होता है।

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