Sunday, September 27, 2026
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Bastar Pandum 2026 Exhibition : बस्तर पंडुम में राष्ट्रपति मुर्मू का जनजातीय प्रेम: स्टॉलों पर कलाकृतियों को निहारा, कारीगरों से जानी माटी की कहानी

Bastar Pandum 2026 Exhibition : बस्तर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बस्तर पंडुम के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित एक वृहद प्रदर्शनी का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने बस्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प, चित्रकला और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉलों का अवलोकन किया। राष्ट्रपति ने इसे आदिवासी विरासत को संजोने और दुनिया तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बताया।बस्तर पण्डुम: स्टॉलों में बहीं बस्तर की माटी की सुंगध, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देखी जनजातीय परंपराओं और संस्कृति की प्रदर्शनी

हस्तशिल्प की बारीकियों ने खींचा ध्यान

प्रदर्शनी में बस्तर की विश्वप्रसिद्ध कलाओं का सजीव प्रदर्शन किया गया:

  • ढोकरा कला: ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से निर्मित मूर्तियों को देखकर राष्ट्रपति ने कारीगरों के कौशल की सराहना की। इसमें मिट्टी, मोम और पीतल का उपयोग कर देवी-देवताओं की आकृतियां बनाई जाती हैं।

  • लौह शिल्प और बांस कला: गढ़े हुए लोहे (Wrought Iron) से बनी कलाकृतियों और बांस से तैयार सजावटी वस्तुओं ने राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया।

  • टेराकोटा और नक्काशी: मिट्टी के बर्तनों (टेराकोटा) और सागौन-साल की लकड़ी पर उकेरी गई (Wood Carving) धार्मिक व सांस्कृतिक मूर्तियों का उन्होंने गहराई से निरीक्षण किया।

जनजातीय वेशभूषा और आभूषणों की चमक

एक विशेष स्टॉल में बस्तर की प्रमुख जनजातियों—दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा और हल्बा—की पारंपरिक वेशभूषा प्रदर्शित की गई। चाँदी, शंख और मोतियों से बने हस्तनिर्मित आभूषणों ने आदिवासी समुदायों की विशिष्ट पहचान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

तुम्बा और चित्रकला: पीढ़ियों की धरोहर

राष्ट्रपति ने तुम्बा कला (सूखी लौकी से बने वाद्य यंत्र) और बस्तर की जनजातीय चित्रकला का भी अवलोकन किया। इन चित्रों में जंगल, लोक देवता और पर्व-त्योहारों को प्राकृतिक रंगों के माध्यम से उकेरा गया था, जो पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं।

स्थानीय व्यंजनों का प्रदर्शन

प्रदर्शनी में बस्तर के अनूठे स्वाद को भी स्थान मिला। यहाँ प्रदर्शित पारंपरिक व्यंजनों और पेय पदार्थों में शामिल थे:

  • प्रमुख व्यंजन: आमट, चापड़ा चटनी (लाल चींटी की चटनी), मंडिया पेज, पान बोबो, तीखुर और जोंधरी लाई के लड्डू।

  • पेय पदार्थ: पारंपरिक पेय ‘लांदा’ और ‘सल्फी’ का भी प्रदर्शन किया गया।

साहित्य और लोकचित्रों का संगम

प्रदर्शनी के अंतिम भाग में बस्तर के इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य और लोक जीवन से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ जनजातीय समाज पर आधारित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया, जिसे राष्ट्रपति ने बहुत महत्वपूर्ण बताया।

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