Administrative Negligence Sehore : सीहोर (10 फरवरी 2026): मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में परीक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ‘डिप्लोमा इन प्राइमरी स्कूल एजुकेशन’ (DPSE) की परीक्षा के दौरान सरस्वती शिशु विद्या मंदिर केंद्र पर परीक्षार्थियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। यहाँ गर्भवती और अस्वस्थ महिला परीक्षार्थियों को घंटों जमीन पर टाट-पट्टी पर बैठाकर परीक्षा दिलाई गई।
कुर्सी-डेस्क के बजाय मिली टाट-पट्टी
परीक्षा देने पहुँची कई महिलाओं ने बताया कि केंद्र पर बैठने की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं थी। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए घंटों जमीन पर बैठकर लिखना बेहद कष्टदायक और जोखिम भरा रहा। इस अव्यवस्था के कारण कई परीक्षार्थियों को शारीरिक पीड़ा और भारी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा।
स्कूल प्रबंधन की सफाई
इस मामले पर विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि शिक्षा विभाग ने केंद्र की क्षमता और उपलब्ध फर्नीचर की जानकारी लिए बिना ही तय संख्या से अधिक परीक्षार्थियों का केंद्र यहाँ घोषित कर दिया। स्कूल के अनुसार, अचानक बढ़ी भीड़ के कारण बैठने की व्यवस्था कम पड़ गई।
जिला शिक्षा अधिकारी की त्वरित कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) संजय सिंह तोमर ने परीक्षा केंद्र का औचक निरीक्षण किया। मौके पर शिकायत सही पाए जाने और परीक्षार्थियों की दयनीय स्थिति देख उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। डीईओ ने लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के लिए तत्काल प्रभाव से केंद्र अध्यक्ष को पद से हटा दिया है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
भले ही केंद्र अध्यक्ष पर कार्रवाई कर दी गई हो, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल एक अधिकारी को हटा देने से उन महिलाओं का दर्द कम होगा जिन्हें इस स्थिति में परीक्षा देनी पड़ी? यह घटना दर्शाती है कि परीक्षा केंद्रों के चयन और वहां की सुविधाओं के ऑडिट में शिक्षा विभाग कितनी बड़ी चूक कर रहा है।













