Abhay Mishra Semariya MLA : रीवा (विकास बघेल)। मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की विधायकी पर कानूनी संकट गहरा गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने विधायक की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दायर चुनाव याचिका (Election Petition) को शुरुआती स्तर पर ही निरस्त करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति विनय सराफ की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनकी विस्तृत सुनवाई (Trial) आवश्यक है।
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मात्र 637 वोटों का अंतर और ‘छिपाई गई’ जानकारी
बता दें कि 2023 के विधानसभा चुनाव में अभय मिश्रा ने भाजपा प्रत्याशी कृष्णपति त्रिपाठी को महज 637 मतों के करीबी अंतर से हराया था। त्रिपाठी ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए 16 जनवरी 2024 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि यदि नामांकन के समय सही जानकारियां दी जातीं, तो परिणाम कुछ और हो सकते थे।
शपथ पत्र (Affidavit) में गड़बड़ी के गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता कृष्णपति त्रिपाठी ने आरटीआई और अन्य दस्तावेजों के आधार पर विधायक पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाने का आरोप लगाया है:
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आपराधिक रिकॉर्ड: आरोप है कि अभय मिश्रा ने फॉर्म-26 में अपने विरुद्ध दर्ज 9 आपराधिक प्रकरणों का उल्लेख नहीं किया और वहां “Not Applicable” लिख दिया।
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बैंक ऋण की जानकारी: याचिका के अनुसार, विधायक ने ICICI बैंक से लिए गए लगभग 23 लाख रुपये के ऋण की जानकारी नहीं दी, जो ब्याज सहित अब 50 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।
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आय के स्रोत: निजी कंपनी से मिलने वाले वेतन का जिक्र तो किया गया, लेकिन कंपनी का नाम और विवरण गुप्त रखा गया।
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सरकारी अनुबंध: याचिका में यह भी दावा किया गया है कि अभय मिश्रा के कुछ सरकारी विभागों के साथ अनुबंध (Contract) थे, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव लड़ने की पात्रता को प्रभावित करते हैं।
कोर्ट की टिप्पणी: “आरोप सिद्ध हुए तो यह ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में”
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नामांकन पत्र में संपत्तियों या आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाना प्रथम दृष्टया “भ्रष्ट आचरण” (Corrupt Practice) की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने तकनीकी आधार पर याचिका खारिज करने से मना करते हुए विधायक अभय मिश्रा को चार सप्ताह के भीतर लिखित जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
क्या जा सकती है विधायकी?
अब यह मामला ‘ट्रायल’ यानी गवाही और साक्ष्यों के दौर में प्रवेश करेगा। यदि ट्रायल के दौरान आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो न्यायालय अभय मिश्रा के निर्वाचन को शून्य (Void) घोषित कर सकता है। ऐसी स्थिति में उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है और क्षेत्र में उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।











