ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर दुखी सोनिया गांधी का लेख, बोलीं- खलती है मोदी सरकार की चुप्पी

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए साझा सैन्य हमले और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की है।

उन्होंने अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में कहा कि किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की टारगेटेड किलिंग अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार को दर्शाती है। उनके अनुसार, इस मामले में नई दिल्ली की प्रतिक्रिया स्पष्ट नहीं रही है।

‘संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का मुद्दा’

सोनिया गांधी ने लिखा कि भारत सरकार ने न तो ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन की खुलकर निंदा की और न ही हत्या पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के विपरीत है।उनका कहना था कि ऐसी घटनाओं पर चुप्पी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा सकती है।

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संसद में बहस और रणनीतिक स्पष्टता की मांग

सोनिया गांधी ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर संसद में खुली और स्पष्ट बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के कमजोर होने और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता जैसे विषय सीधे भारत के कूटनीतिक हितों को प्रभावित करते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि एक लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से सामने रखनी चाहिए।

ईरान-भारत संबंधों का जिक्र

अपने लेख में उन्होंने ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सभ्यतागत रिश्ते रहे हैं और अतीत में कूटनीतिक सहयोग भी देखने को मिला है।

साथ ही, इजराइल के साथ भारत के बढ़ते रक्षा और तकनीकी संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने संतुलित कूटनीति की आवश्यकता पर बल दिया।

‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और गुटनिरपेक्षता का संदर्भ

सोनिया गांधी ने भारत की पारंपरिक विदेश नीति—गुटनिरपेक्षता और वसुधैव कुटुम्बकम—का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की पहचान न्याय, शांति और संवाद के सिद्धांतों पर आधारित रही है।

उनके अनुसार, वर्तमान वैश्विक संकट के दौर में भारत को अपनी रणनीतिक स्पष्टता और नैतिक प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए।ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के बीच दिए गए इस बयान ने भारतीय राजनीति और विदेश नीति पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

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