12 राज्यों में वोटर लिस्ट संशोधन से 1.70 करोड़ नाम हटे, SIR के बाद नौ राज्यों में 7.99% मतदाता कम

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नौ राज्यों में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद कुल 7.993% मतदाता कम हो गए हैं। हटाए गए नामों की संख्या 1,70,28,514 बताई जा रही है।

27 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई इस प्रक्रिया के दौरान कुल मतदाताओं की संख्या 21,45,62,215 थी, जो अब घटकर 19,75,33,701 रह गई है।

 किस राज्य में कितनी गिरावट?

बड़े राज्यों में गुजरात में सबसे अधिक 13.4% की गिरावट दर्ज की गई। यहां मतदाता संख्या 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई।केरल में सबसे कम 3.22% की कमी देखी गई। मध्य प्रदेश में 34.35 लाख नाम कम हुए, हालांकि प्रतिशत के हिसाब से गिरावट 5.96% रही।

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राजस्थान में 31.36 लाख (5.74%) मतदाता कम हुए, जबकि छत्तीसगढ़ में 24.99 लाख नाम हटाए गए, जो अनुपात के लिहाज से 11.77% की उल्लेखनीय गिरावट है।

 बिहार जोड़ें तो आंकड़ा और बड़ा

अगर बिहार के पिछले वर्ष हुए SIR को भी शामिल किया जाए, तो हटाए गए नामों की कुल संख्या 2.16 करोड़ यानी 7.37% तक पहुंच जाती है। बिहार में जून 2024 में 7.89 करोड़ मतदाता थे, जो सितंबर 2024 में घटकर 7.43 करोड़ रह गए।

 नाम हटने के कारण क्या रहे?

SIR प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं को पंजीकरण का अवसर दिया गया था। साथ ही, आपत्तियां दर्ज कराने और नाम हटाने के लिए भी आवेदन स्वीकार किए गए।

कुछ मामलों में ड्राफ्ट रोल में नाम होने के बावजूद हटाए गए क्योंकि संबंधित मतदाता 2002-2003 के SIR रिकॉर्ड का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।

 यूपी, बंगाल और तमिलनाडु की सूची बाकी

तमिलनाडु की अंतिम मतदाता सूची जल्द जारी होने वाली है। पश्चिम बंगाल की सूची का एक हिस्सा 28 फरवरी को आएगा, जबकि शेष सूची न्यायिक जांच के बाद जारी होगी। उत्तर प्रदेश की सूची 6 अप्रैल को जारी किए जाने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में हुए इन बड़े बदलावों का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। चुनाव आयोग की इस व्यापक प्रक्रिया ने पारदर्शिता और सटीकता को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।

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