निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1100 अंक तक फिसल गया, जबकि निफ्टी 50 अपने निचले स्तर 25,567.75 पर पहुंच गया। इस गिरावट से खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर प्रभावित हुए और निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। बीएसई सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी घटकर लगभग 466 लाख करोड़ रुपये रह गया।
मुनाफावसूली ने बढ़ाया दबाव
हाल के दिनों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी। बजट, नीतिगत फैसलों और तिमाही नतीजों जैसे बड़े घरेलू ट्रिगर खत्म होने से बाजार को नई दिशा नहीं मिल पाई, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ा।
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फेड नीति और विदेशी निवेश की भूमिका
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका से डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे विदेशी निवेश उभरते बाजारों से बाहर जा सकता है और भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
कच्चे तेल और वैश्विक तनाव का असर
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का कारण है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है, जिसके चलते जोखिम लेने की प्रवृत्ति कमजोर हुई।
आगे की राह क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि लार्जकैप शेयर अपेक्षाकृत संतुलित मूल्यांकन पर हैं, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप अभी भी महंगे दिखते हैं। नए सकारात्मक ट्रिगर मिलने पर 2026 के दौरान बाजार में दोबारा तेजी संभव है, हालांकि फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।













