CG News: रायपुर। ग्रामीण अभियांत्रिक सेवा वर्ष 2011 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा 66 उप अभियंताओं (सिविल) की नियुक्तियां निरस्त किए जाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। इससे संबंधित अधिकारियों को फिलहाल राहत मिली है।
CG News: गौरतलब है कि इस भर्ती को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता रवि तिवारी ने अधिवक्ता शाल्विक तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 3 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए 66 उप अभियंताओं की नियुक्तियों को नियमों के विरुद्ध बताते हुए निरस्त कर दिया था।
CG News: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि विज्ञापन के अनुसार निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य था, जबकि कई चयनित अभ्यर्थियों ने डिग्री या डिप्लोमा बाद में प्राप्त किया। इसके अलावा, 275 पदों के लिए जारी विज्ञापन के बावजूद अधिक पदों पर नियुक्ति को भी सेवा नियमों के विपरीत माना गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि लंबी सेवा अवधि अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती।
CG News: हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ प्रभावित कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की। बुधवार, 11 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शासन को नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
CG News: सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों की सेवा की निरंतरता अब अंतिम निर्णय तक यथावत रहेगी। मामले में याचिकाकर्ताओं एवं निजी प्रत्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, परमेश्वर के. और गौरव अग्रवाल ने पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा, चंद्रशेखर ए. चकलाब्बी (AOR) और सुधांशु प्रकाश (AOR) भी उपस्थित रहे।











