Tuesday, August 18, 2026
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Supreme Court on Digital Arrest : सुप्रीम कोर्ट : डिजिटल अरेस्ट पर जताई गहरी चिंता; कहा— “बुजुर्गों की जमा-पूंजी लूट रहे ठग, बैंक अधिकारियों की मिलीभगत भी शामिल”

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Supreme Court on Digital Arrest : नई दिल्ली (09 फरवरी 2026): सुप्रीम कोर्ट ने देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मकड़जाल पर सोमवार को गंभीर चिंता व्यक्त की है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि साइबर ठगी के इन मामलों में कई जगह बैंक अधिकारियों की संदिग्ध मिलीभगत सामने आई है। कोर्ट ने विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाए जाने पर दुख जताया और इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार को सख्त निर्देश जारी किए।

रिटायर्ड दंपति की व्यथा का जिक्र

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक रिटायर्ड दंपति का उदाहरण दिया, जिनकी जीवन भर की कमाई ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर लूट ली। कोर्ट ने कहा कि ठगों का तरीका इतना पेशेवर होता है कि आम आदमी भ्रमित हो जाता है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने केंद्र की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि सरकार ने इससे निपटने के लिए अब एक व्यापक ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) तैयार की है।

दो हफ्ते के भीतर लागू होगी नई SOP

सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया कि 2 जनवरी 2026 को तैयार की गई एसओपी को अगले दो हफ्तों के भीतर नोटिफाई कर पूरे देश में लागू किया जाए। कोर्ट ने आरबीआई (RBI) की उस एसओपी का भी समर्थन किया, जिसमें साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर बैंक खातों पर तत्काल ‘अस्थायी डेबिट होल्ड’ लगाने का प्रावधान है, ताकि पैसा ठगों के खाते में ट्रांसफर न हो सके।

जांच एजेंसियों को निर्देश: सीबीआई और आईटी मंत्रालय सक्रिय

अदालत ने इस मामले में बहु-एजेंसी समन्वय (Inter-agency coordination) की आवश्यकता पर बल दिया है:

  • सीबीआई: डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पहचान कर गहन जांच के निर्देश।

  • आरबीआई: बैंकों को त्वरित कदम उठाने और संदिग्ध खातों पर नजर रखने का आदेश।

  • आईटी मंत्रालय: समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश।

अगले 4 हफ्तों में तैयार होगा ड्राफ्ट

कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार हफ्तों के भीतर एक प्रभावी एमओयू (MoU) का ड्राफ्ट तैयार करने को कहा है, जिससे विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां सूचनाएं साझा कर सकें। सरकार ने कोर्ट को बताया कि एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति पहले ही इन घोटालों की गहराई से जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से उम्मीद जागी है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे संगठित अपराधों पर अब लगाम लग सकेगी।

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