Pathalgaon Administration Failure : गौरी शंकर गुप्ता/पत्थलगांव। जशपुर जिले के पत्थलगांव हाई स्कूल मैदान में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में प्रशासन की संवेदनहीनता और घोर लापरवाही का चेहरा सामने आया है। एक ओर जहाँ पूरा देश आजादी के पर्व को गौरव के साथ मना रहा था, वहीं पत्थलगांव में आयोजित मुख्य समारोह कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गया। चिलचिलाती धूप के बीच घंटों खड़े रहने के कारण स्कूली बच्चों की हालत बिगड़ने लगी, जिससे प्रशासन के ‘भव्य’ दावों की पोल खुल गई।
समारोह के दौरान सबसे विचलित करने वाली स्थिति तब पैदा हुई, जब आयोजन स्थल पर बच्चों के लिए छाया की कोई व्यवस्था नहीं थी। घंटों धूप में खड़े रहने के कारण नौनिहाल बिलबिला उठे। संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई जब शिक्षकों को खुद आगे आकर बैंड सीट और अन्य साधनों से बच्चों के लिए ‘ढाल’ बनना पड़ा। यह दृश्य वहां मौजूद क्षेत्रीय विधायक गोमती साय और जिले के आला प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में घटित हुआ, लेकिन किसी ने भी इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाई।
अव्यवस्थाओं का आलम केवल बच्चों तक सीमित नहीं था; लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारों के लिए भी कोई सम्मानजनक व्यवस्था नहीं की गई थी। कार्यक्रम की कवरेज करने पहुँचे मीडिया प्रतिनिधियों को बैठने के लिए दीर्घा न होने के कारण खड़े होकर काम करना पड़ा। यही स्थिति आम नागरिकों की भी रही, जो कुर्सियों की कमी के चलते पंडाल के बाहर और मैदान के कोनों में खड़े होकर कार्यक्रम देखने को मजबूर हुए।
यह पूरी घटना अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। क्या राष्ट्रीय पर्व के लिए आवंटित फंड केवल फाइलों तक ही सीमित रह गया? सत्ता और शासन के दिग्गजों की मौजूदगी में ऐसी लापरवाही अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। अब देखना यह होगा कि क्या जिला कलेक्टर उन जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे जिन्होंने राष्ट्रीय गौरव के इस दिन को अव्यवस्थाओं के कारण शर्मसार किया है।
राष्ट्रीय पर्व पर ऐसी उदासीनता न केवल शर्मनाक है, बल्कि उन देशभक्तों का भी अपमान है जो इस दिन को उत्सव की तरह देखते हैं। अगर प्रशासन भविष्य में भी ऐसी ही ‘मौन’ लापरवाही बरतता है, तो आम जन का इन आयोजनों से मोहभंग होना निश्चित है।











