Wednesday, August 19, 2026
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Sanitation Workers Strike Gwalior : अस्पताल में गंदगी से हाहाकार: डीन ने कंपनी पर लगाया जुर्माना, लेकिन मरीजों को कब मिलेगी राहत?

Sanitation Workers Strike Gwalior : ग्वालियर: अंचल के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, जयारोग्य अस्पताल (JAH) समूह में पिछले कुछ दिनों से गंदगी का आलम बना हुआ है। वार्डों और गलियारों में कचरे के ढेर लग गए हैं, जिससे भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल के भीतर ही नए संक्रमण (Infection) का डर सता रहा है। यह गंभीर स्थिति सफाई कर्मियों द्वारा अचानक काम बंद किए जाने के कारण उत्पन्न हुई है।

एरियर को लेकर छिड़ी जंग: विवाद की मुख्य जड़ आउटसोर्स कंपनी की मनमानी और सफाई कर्मचारियों का बकाया एरियर है। कर्मचारियों का आरोप है कि वे महीनों से काम कर रहे हैं, लेकिन कंपनी उनके एरियर का भुगतान करने में आनाकानी कर रही है। हताश होकर कर्मचारियों ने लामबंद होकर हड़ताल का रास्ता चुना, जिससे अस्पताल की पूरी सफाई व्यवस्था ठप हो गई।

प्रशासनिक हस्तक्षेप: मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम नरेंद्र बाबू यादव ने मौके पर पहुँचकर सफाई कर्मियों से संवाद किया। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को उच्च स्तर पर हल किया जा रहा है, जिसके बाद कर्मचारियों को फिलहाल काम पर वापस लौटने के लिए मनाया गया।

डीन का बयान और प्रदेश स्तरीय संकट: जेएएच के डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने इस समस्या को केवल ग्वालियर तक सीमित न बताते हुए इसे पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों का संकट करार दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था में भुगतान की समस्या बनी हुई है। डॉ. धाकड़ ने बताया कि संबंधित कंपनी पर जुर्माना (Fine) लगाया गया है और चेतावनी दी गई है कि एक निश्चित अवधि के भीतर एरियर का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

बहरहाल, प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद कर्मचारी काम पर तो लौट आए हैं, लेकिन सवाल अब भी बरकरार है कि क्या आउटसोर्स कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगी या भविष्य में फिर मरीजों को गंदगी के बीच दिन काटने पड़ेंगे।

“कर्मचारियों को फिलहाल काम पर वापस लौटने के लिए कहा गया है। उनकी एरियर संबंधी मांगों को लेकर उच्च अधिकारियों से चर्चा की जा रही है।” — नरेंद्र बाबू यादव, एसडीएम, लश्कर ग्वालियर

“आउटसोर्स कर्मचारियों के एरियर का मुद्दा पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में है। हमने कंपनी को सख्त चेतावनी और फाइन जारी किया है।” — डॉ. आर.के.एस. धाकड़, डीन, जयारोग्य अस्पताल समूह

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