Bhopal Beef Smuggling Case : भोपाल: राजधानी में पिछले दिनों पकड़े गए 26 टन गौ मांस के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे सिंडिकेट को कानूनी संरक्षण देने के लिए किस तरह दस्तावेजों की बाजीगरी की जा रही थी, इसका प्रमाण अब सामने आ गया है। 17 दिसंबर को हिंदूवादी संगठनों द्वारा पकड़े गए ट्रक के मामले में वेटनरी डॉक्टर अनम खान का एक लेटर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने ट्रक में मौजूद गौ मांस को ‘भैंस का मांस’ (Buff) बताकर प्रमाणित किया था।
अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जारी किया पत्र: हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के कॉन्ट्रैक्ट और नियमों के अनुसार, किसी भी बाहरी या निजी डॉक्टर को मांस के अप्रूवल देने की स्वीकृति नहीं थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि डॉ. अनम खान ने किस हैसियत और किसके दबाव में यह ‘सत्यापन पत्र’ जारी किया? यह पत्र न केवल तस्करी को बढ़ावा देने वाला था, बल्कि जांच एजेंसियों को गुमराह करने की एक बड़ी कोशिश भी थी।
कार्रवाई में दोहरा मापदंड? 17 दिसंबर को जब हिंदूवादी संगठनों ने गाड़ी पकड़ी और जांच में गौ मांस की पुष्टि हुई, तो प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डॉ. गौर को सस्पेंड कर दिया था। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस डॉ. अनम खान ने इस अवैध खेप को वैध बताने का पत्र जारी किया, वह अब तक पुलिस और नगर निगम की कार्रवाई से बाहर क्यों है?
आरोपी को मिल चुकी है राहत: एक तरफ जहां नए खुलासे हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में मुख्य आरोपी और स्लाटर हाउस के संचालक असलम चमड़ा को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। अब डॉ. अनम खान का पत्र सामने आने के बाद शहर के हिंदूवादी संगठनों में आक्रोश है और वे डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।













