Friday, August 28, 2026
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Swiggy-Zomato से Amazon की डिलीवरी सेवाएं हो सकती हैं ठप, 31 दिसंबर को गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल

gig workers
31 दिसंबर को डिलीवरी सेवाएं ठप

 निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : देशभर के गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल का असर Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Flipkart, Amazon और अन्य ई-कॉमर्स व क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की डिलीवरी सेवाओं पर पड़ सकता है। वर्ष के आखिरी दिन होने वाली यह हड़ताल लाखों उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों के लिए चुनौती बन सकती है।

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के अनुसार, गिग वर्कर्स घटती कमाई, खराब कामकाजी परिस्थितियों, सुरक्षा की कमी और सोशल सिक्योरिटी न मिलने के विरोध में सड़कों पर उतरने जा रहे हैं।

 हड़ताल की वजह क्या है?

वर्कर्स का कहना है कि ऐप-बेस्ड कंपनियां लगातार इंसेंटिव घटा रही हैं, काम का दबाव बढ़ा रही हैं और मनमाने तरीके से आईडी ब्लॉक कर दी जाती है। इसके अलावा 10 मिनट डिलीवरी जैसे मॉडल से उनकी जान जोखिम में पड़ रही है।

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गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें

गिग वर्कर्स ने सरकार और कंपनियों के सामने 9 प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • पारदर्शी और स्थायी वेतन ढांचा लागू हो

  • 10 मिनट डिलीवरी मॉडल तुरंत बंद किया जाए

  • बिना वजह ID ब्लॉक और पेनल्टी पर रोक

  • हेलमेट, रेनकोट जैसे सेफ्टी गियर उपलब्ध कराए जाएं

  • एल्गोरिदम के जरिए भेदभाव खत्म किया जाए

  • प्लेटफॉर्म और ग्राहकों से सम्मानजनक व्यवहार

  • काम के दौरान ब्रेक और वर्किंग ऑवर तय हों

  • ऐप और टेक्निकल सपोर्ट मजबूत किया जाए

  • हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर और पेंशन मिले

सरकार से रेगुलेशन की मांग

यूनियनों ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि प्लेटफॉर्म कंपनियों को रेगुलेट किया जाए, ताकि गिग वर्कर्स को भी संगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।

गिग वर्कर्स कौन होते हैं?

गिग वर्कर्स वे कर्मचारी होते हैं जो प्रति काम के हिसाब से भुगतान पर काम करते हैं। ये पांच श्रेणियों में आते हैं—
इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्कर, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी, ऑन-कॉल वर्कर और अस्थायी कर्मचारी।

निष्कर्ष

31 दिसंबर की यह हड़ताल सिर्फ डिलीवरी सेवाओं को ही नहीं, बल्कि डिजिटल इकॉनमी और श्रम कानूनों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार और कंपनियां इन मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं।

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