Tuesday, August 18, 2026
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Year Ender 2025: चुनाव, कानून और विवाद! भारतीय राजनीति के लिए यादगार रहा साल 2025

modi rahul gandhi
2025 में बदली सियासत की तस्वीर

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : साल 2025 अब विदा लेने को है। जैसे कोई बीता हुआ दौर अपने पीछे यादों की गठरी छोड़ जाता है, वैसे ही यह साल भी भारतीय राजनीति में कई ऐतिहासिक, विवादास्पद और चौंकाने वाले घटनाक्रम दर्ज कर गया। चुनावी उलटफेर से लेकर बड़े कानूनों, नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं और चुनावी संस्थाओं पर उठे सवालों तक—2025 राजनीतिक रूप से बेहद हलचल भरा रहा।

दिल्ली की सत्ता में बड़ा उलटफेर

2025 की सबसे बड़ी सियासी खबर दिल्ली विधानसभा चुनाव रहे, जहां भारतीय जनता पार्टी ने 70 में से 48 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। आम आदमी पार्टी 22 सीटों पर सिमट गई, जबकि कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की हार ने इस जीत को और ऐतिहासिक बना दिया। भाजपा ने रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर नई राजनीतिक शुरुआत की।

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RSS के 100 साल और वैचारिक संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान संघ ने राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता पर जोर दिया। संघ प्रमुख मोहन भागवत का “भारत को विश्व गुरु बनाने” का बयान खासा चर्चा में रहा।

75 वर्ष के हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस पर समर्थकों और विरोधियों—दोनों ने उनके राजनीतिक सफर का आकलन किया। जहां एक ओर सक्रिय राजनीति से हटने की अटकलें तेज हुईं, वहीं भाजपा ने स्पष्ट किया कि 2029 का लोकसभा चुनाव मोदी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।

बिहार में NDA का रिकॉर्ड बहुमत

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटों पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया। नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री बने। विपक्ष पूरी तरह बिखरा नजर आया, जिससे राजनीतिक संतुलन पूरी तरह NDA के पक्ष में चला गया।

प्रशांत किशोर की सियासी एंट्री

चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा, लेकिन बिहार में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनके आने से राजनीति में नए प्रयोग और बहस शुरू हुई।

वक्फ संशोधन कानून और ‘वन नेशन वन इलेक्शन’

वक्फ (संशोधन) कानून 2025 और ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ विधेयक ने संसद से सड़कों तक बहस छेड़ दी। विपक्ष ने इन पर संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने के आरोप लगाए, जबकि सरकार ने इन्हें सुधारवादी कदम बताया।

वोटर लिस्ट और ‘वोट चोरी’ विवाद

SIR अभियान के तहत लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिससे विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए, जिन्हें चुनाव आयोग ने सिरे से खारिज किया।

BJP अध्यक्ष पद पर सस्पेंस

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सालभर अटकलें चलती रहीं, लेकिन 2025 के अंत तक यह फैसला टलता नजर आया।

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