Tuesday, September 1, 2026
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M.P News : ‘सीरियस मिसकंडक्ट’ नोटिस के बाद टूटी डॉक्टर रश्मि वर्मा, की आत्महत्या की कोशिश, AIIMS की कार्य-संस्कृति पर सवाल

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डॉ. रश्मि वर्मा मामले की हाई लेवल जांच शुरू

भोपाल : भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा का मामला सुर्खियों में है। बताया जा रहा है कि यह केवल एक मेडिकल इमरजेंसी नहीं था, बल्कि संस्थान के भीतर प्रशासनिक दबाव और तनाव का नतीजा था।

‘सीरियस मिसकंडक्ट’ नोटिस से उत्पन्न तनाव
10 सितंबर 2025 की शाम करीब 5 बजे डॉ. रश्मि वर्मा को “सीरियस मिसकंडक्ट” शीर्षक वाला नोटिस दिया गया। नोटिस मिलने के बाद उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। सहकर्मियों का कहना है कि इस नोटिस के शब्द और टोन ने उन्हें काफी परेशान किया।

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HOD से मिलने पर रोक, संवाद का मार्ग बंद
मामले में यह भी सामने आया कि डॉ. वर्मा को अपने विभागाध्यक्ष (HOD) से बिना अपॉइंटमेंट मिलने से रोका गया। इस कदम से उनके लिए अपने पक्ष को स्पष्ट करना और प्रशासन से बातचीत करना मुश्किल हो गया।

आत्मघाती प्रयास, गंभीर चिंता का संकेत
बताया जा रहा है कि ड्यूटी से लौटकर डॉ. रश्मि ने आत्महत्या का प्रयास किया। समय पर चिकित्सा मदद मिलने से उनकी जान बच गई। इस घटना ने एम्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य और कर्मचारी कल्याण नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

नोटिस के बाद मानसिक स्थिति
परिजनों और सहयोगियों के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद डॉ. रश्मि लगातार तनाव और चिंता में थीं। नींद न आना, भय और करियर को लेकर अनिश्चितता उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहे थे।

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क्या प्रशासनिक प्रक्रिया पर्याप्त है?
यह घटना यह सवाल खड़ा करती है कि

  • क्या एम्स जैसे संस्थानों में शिकायत निवारण और काउंसलिंग व्यवस्था पर्याप्त है?
  • क्या प्रशासनिक नोटिस जारी करते समय कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रशासनिक कार्रवाई कितनी उचित और संवेदनशील थी।

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