उज्जैन: पवित्र नगरी उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के 28 नवंबर 2025 को आयोजित हुई भस्म आरती का दिव्य दृश्य हर श्रद्धालु के हृदय को भक्ति भावना से भर गया। तड़के 4 बजे जैसे ही आरती प्रारंभ हुई, मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूँज उठा और वातावरण में एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा फैल गई। हजारों भक्त इस दुर्लभ क्षण के साक्षी बने और भगवान महाकाल के दरबार में उपस्थित होकर स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस किया।
वैदिक मंत्रों की ध्वनि में सम्पन्न हुआ पावन अभिषेक
शुक्रवार तड़के की यह भस्म आरती प्राचीन परंपराओं और औपचारिक वैदिक नियमों के अनुसार सम्पन्न की गई। पुजारियों द्वारा शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत और दिव्य भस्म से अभिषेक किया गया। इसके साथ ही रुद्राष्टक, रुद्रपाठ और शिव तांडव स्तोत्र की गूँज ने माहौल को और अधिक पवित्रता से भर दिया। गर्भगृह से निकलती दिव्य कंपन और मंत्रों की अनुगूँज ने आरती में उपस्थित श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक अनुभव से जोड दिया।
दूर-दूर से उमड़ी भीड़, प्रथम दर्शन की उत्सुकता चरम पर
महाकाल की भस्म आरती का महत्व भारतभर में अद्वितीय माना जाता है। इसी कारण मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और दक्षिण भारत तक से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे। कई भक्त तो रात से ही लंबी कतारों में लग गए थे ताकि वे आरती के दौरान प्रारंभिक पंक्ति में बैठकर भगवान महाकाल का साक्षात अद्भुत दर्शन प्राप्त कर सकें। बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने हेतु मंदिर प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की और दर्शनों को सुचारू बनाने के लिए विशेष निर्देश जारी किए।
लाखों भक्त ऑनलाइन प्रसारण से जुड़े, तकनीक ने बढ़ाया भाविकों का उत्साह
जो भक्त उज्जैन नहीं पहुँच सके, उनके लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर आरती का सीधा प्रसारण किया गया। देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने घर बैठे ही इस दिव्य आरती का दर्शन किया और अपने मन को आध्यात्मिक शांति से सराबोर किया। डिजिटल माध्यम के कारण विदेशों में बसे भारतीय भी इस पर्व का हिस्सा बन सके। तकनीक और परंपरा के इस सुन्दर संगम ने 2 नवंबर की भस्म आरती को यादगार और अधिक प्रभावशाली बना दिया।











