Saturday, August 15, 2026
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Retired Teachers Inspirational Story : सरगुजा के रिटायर्ड टीचर ने जवानों को किया शर्मिंदा! ढलती उम्र में मेहनत से खेती में किया कमाल

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Retired Teachers Inspirational Story/सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के 75 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक कपिलराम बघेल ने अपनी 40 साल की सेवा के बाद अब मानों खेती को ही अपने जीवन का नया उद्देश्य बना लिया है। आज उनकी उम्र भले ही ज्यादा हो गई है, लेकिन उनका उत्साह और मेहनत युवा किसानों को भी प्रेरित और शर्मिंदा दोनों कर रही है। पिछले चार-पाँच वर्षों से वे लहसुन की पारंपरिक खेती कर रहे हैं और इसमें रासायनिक खाद के बजाय देशी जैविक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस बाबत पूछने पर कपिलराम बघेल बताते हैं कि प्राकृतिक खाद से फसल का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर रहती है। अच्छी पैदावार होने पर वे इसका एक हिस्सा अपनी दुकान में बेचते हैं और बाकी घर में इस्तेमाल करते हैं। उनका मानना है कि खेती में धैर्य, मेहनत और सादगी सबसे अहम हैं।

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लोकल बीज और पारंपरिक रोपाई

Retired Teachers Inspirational Story अपनी खेती को लेकर कपिलराम बघेल कहते हैं कि उनके खेत में इस्तेमाल होने वाला लहसुन पूरी तरह स्थानीय किस्म का है। वे खेती में पुरानी पारंपरिक “रोपच” विधि अपनाते हैं, जिससे लहसुन की पैदावार में टिकाऊपन और स्वाद बढ़ता है। शुरू में उन्होंने थोड़ी मात्रा में खेती की थी, लेकिन अब खेत का रकबा बढ़ा दिया है।

गोबर की खाद से स्वस्थ फसल

इस मामले में कपिलराम बघेल रिटायर्ड शिक्षक का कहना है कि खेत में केवल गोबर की खाद ही डालते हैं। जबकि रासायनिक खाद फसल को जल्दी बढ़ाती है, पर उसका टिकाऊपन कम होता है। प्राकृतिक खाद से खेती धीमी होती है, लेकिन फसल मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बनती है।

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खुद की उपज की बिक्री

Retired Teachers Inspirational Story कपिलराम बघेल अपनी उपज का एक हिस्सा बाजार में बेचते हैं और वहीं कुछ घर के लिए रखते हैं। उनके पास अपनी दुकान भी है, जिससे वे सीधे अपने उत्पादक से ग्राहकों तक पहुँचते हैं।

रिटायरमेंट के बाद नया और उत्साही जीवन

कपिलराम बघेल पहले शिक्षक थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पूरी तरह खेती को अपना जीवन बना लिया। उनका कहना है कि खेती से उन्हें मानसिक संतोष और नई ऊर्जा मिली है। वे नई तकनीक और बेहतर तरीकों को अपनाने के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं।

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