Wednesday, August 26, 2026
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Bihar Election 2025: रिकॉर्ड वोटिंग से बदला चुनावी समीकरण! NDA को फिर मिलेगा मौका या महागठबंधन बनाएगी सरकार, समझें 64.66% मतदान का इशारा

BIHAR ELECTION
BIHAR ELECTION

Bihar Election 2025/पटना: जहां बीते 6 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर लगभग 64.66% मतदान हुआ, जो 1952 के बाद किसी भी चुनाव में दर्ज सबसे उच्च मतदान प्रतिशत माना जा रहा है। हालांकि 3,000 से अधिक बूथों की रिपोर्ट अभी आना बाकी है, इसलिए यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

जानकारी के अनुसार इस बार 18 जिलों के 3.75 करोड़ मतदाताओं में लगभग 65% ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तुलना में लगभग 10% अधिक माना जा रहा है। रिकॉर्ड वोटिंग ने सत्तारूढ़ एनडीए और महागठबंधन दोनों की धड़कनें तेज कर दी हैं।

इस बाबत विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रत्याशित मतदान वृद्धि अक्सर सत्ता-विरोधी लहर का संकेत होती है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा जटिल है। नीतीश कुमार के खिलाफ कोई खुला विरोध नहीं दिखा, जबकि तेजस्वी यादव के हर घर नौकरी के वादे पर भी मतदाताओं के प्रेरित होने को लेकर संदेह है।

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वोटिंग के ऐतिहासिक आंकड़े:

  • लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोटिंग: 1998 में 64.60%
  • विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोटिंग: 2000 में 62.57%
  • 2020 विधानसभा चुनाव: 57.29%
  • 2024 लोकसभा चुनाव: 56.28%

SIR का भी प्रभाव
इस बार SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के तहत 65 लाख फर्जी, डुप्लीकेट या निष्क्रिय मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाया गया। इससे सक्रिय मतदाता सूची साफ़ हुई और मतदान प्रतिशत बढ़ने में मदद मिली।

Bihar Election 2025 देखा जाए तो 65 लाख फर्जी या निष्क्रिय मतदाताओं को हटाने से सूची में सक्रिय मतदाता बढ़े हैं। इसके साफ़ माने यह है कि वास्तविक मतदाता अपने मत का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ा। यह आंकड़ा यह भी दिखाता है कि चुनाव में “सशक्त मतदान” की संस्कृति अब बढ़ रही है।

समझें इसके विश्लेषण को
देखा जाए तो बिहार में उच्च वोट प्रतिशत का मतलब हमेशा सत्ता परिवर्तन नहीं रहा। लालू यादव के प्रभाव में वोटिंग 1990 और 1995 में 60% से ऊपर रही थी, जबकि नीतीश कुमार सत्ता में आते समय 2005 में 46.5% और 2010 में 45.85% वोटिंग दर्ज हुई।

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संवेदनशील और निर्णायक सीटों में प्रभाव

साल 2020 में कई सीटों पर जीत का अंतर सिर्फ 5000 वोट से भी कम था। लेकिन इस बार 10% अधिक मतदान के चलते, छोटे अंतर वाली सीटों पर नतीजे बदल सकते हैं।

जहां एनडीए के लिए यह अब चुनौती है कि वह पारंपरिक वोट बैंक को बनाए रखे। वहीं महागठबंधन के लिए यह मौका है कि पिछली बार चूक गए सीटों को जीतकर फिर से संतुलन बदल सके।

रिकॉर्ड मतदान और इसका राजनीतिक असर

जहां पहले चरण में 64.66% मतदान ने दोनों प्रमुख गठबंधनों—एनडीए और महागठबंधन—की धड़कनें तेज कर दी हैं। कहा जाता है कि उच्च वोटिंग अक्सर सत्ता-विरोधी लहर का संकेत होती है, लेकिन बिहार में हमेशा ऐसा नहीं देखा गया।

Bihar Election 2025 हालांकि नीतीश कुमार के खिलाफ कोई व्यापक खुला विरोध नहीं दिखा, जबकि तेजस्वी यादव के वादों (हर घर नौकरी) पर भी मतदाता प्रेरणा की गारंटी नहीं है।

चाहे जो भी हो फिलहाल रिकॉर्ड मतदान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत नहीं देता कि सत्ता किसके पक्ष में झुकेगी। नतीजे आने तक दोनों गठबंधनों की धड़कनें तेज बनी रहेंगी।

 

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