Saturday, August 15, 2026
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11,000 crore bank fraud : ED का बड़ा एक्शन, कॉरपोरेट पावर लिमिटेड के डायरेक्टर्स की 67.79 करोड़ की संपत्ति जब्त…

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11,000 crore bank fraud
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11,000 crore bank fraud : नागपुर/नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹11,000 करोड़ से अधिक के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कॉरपोरेट पावर लिमिटेड (CPL) के प्रमोटरों और डायरेक्टर्स की ₹67.79 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली है। यह कार्रवाई ED के नागपुर जोनल ऑफिस ने की है।

11,000 crore bank fraud : क्या है पूरा मामला?

ED की जांच CBI की FIR पर आधारित है, जिसमें आरोप है कि कॉरपोरेट पावर लिमिटेड (अभिजीत ग्रुप की कंपनी) ने झारखंड में 1080 मेगावॉट का कोयला आधारित पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए बैंकों से लोन लिया था। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के अनुसार, कंपनी ने प्रोजेक्ट की लागत को बढ़ा-चढ़ाकर बताया और फर्जी दस्तावेजों/आंकड़ों का इस्तेमाल करके कई बैंकों से कर्ज हासिल किया।

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कंपनी ने लोन की इस रकम को 800 से अधिक शेल कंपनियों और 5000 बैंक खातों के नेटवर्क के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करके गबन किया। इस धोखाधड़ी के कारण 2013-14 में कंपनी का खाता NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) बन गया, जिससे बैंकों को ब्याज सहित करीब ₹11,379 करोड़ का भारी नुकसान हुआ।

डायरेक्टर्स और संपत्तियां जब्त

ED के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग के इस पूरे खेल में कंपनी के डायरेक्टर्स मनोज जायसवाल, अभिजीत जायसवाल, अभिषेक जायसवाल और उनके करीबी संतोष जैन की मुख्य भूमिका रही है।

डायरेक्टर्स और उनके परिवार के खिलाफ की गई इस कार्रवाई में जब्त की गई ₹67.79 करोड़ की संपत्तियां अवैध कमाई (Proceeds of Crime) से खरीदी गई थीं। इन संपत्तियों में महाराष्ट्र, कोलकाता, दिल्ली और आंध्र प्रदेश में स्थित जमीन, बिल्डिंग, फ्लैट, कमर्शियल स्पेस और बैंक बैलेंस शामिल हैं।

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जांच का दायरा

इससे पहले, ED ने नागपुर, कोलकाता और विशाखापट्टनम में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। इस नई कार्रवाई के साथ ही, इस केस में ED द्वारा अब तक जब्त या फ्रीज की गई कुल संपत्ति ₹571 करोड़ हो गई है। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि बाकी रकम किन माध्यमों से ट्रांसफर या छिपाई गई, इसकी आगे की जांच जारी है।

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