पटना। बिहार की राजनीति में तेज़ी से हलचल मचाते हुए प्रशांत किशोर ने राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और जेडीयू नेता अशोक चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को 1995 के एक मर्डर केस में आरोपी बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं, अशोक चौधरी को चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने मानहानि का नोटिस वापस नहीं लिया, तो 500 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का मामला सार्वजनिक किया जाएगा।
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सम्राट चौधरी ने 1995 में अपनी उम्र कम दिखाकर नाबालिग होने का दावा किया था, ताकि सजा से बच सकें। लेकिन उनके अनुसार 2020 के विधानसभा चुनाव में दिए गए शपथ पत्र के मुताबिक उनकी उम्र 26 साल थी। इस मामले में प्रशांत किशोर ने बिहार राज्यपाल से तत्काल गिरफ्तारी की भी मांग की।
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अशोक चौधरी पर प्रशांत किशोर ने वैभव विकास ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उनके मुताबिक ट्रस्ट के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति खरीदी गई, और अगर नोटिस वापस नहीं लिया गया तो 500 करोड़ की और संपत्ति का खुलासा किया जाएगा।
प्रशांत किशोर ने विपक्षी नेताओं जैसे तेजस्वी यादव और आरजेडी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने शिल्पी-गौतम सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के मामले में सम्राट चौधरी की भूमिका पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि अब बीजेपी में शामिल होने के बाद भी उनका चरित्र जांच का विषय बन सकता है।
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इसके अलावा प्रशांत किशोर ने अपनी हालिया कमाई का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल में उन्हें 241 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 50 करोड़ रुपये आयकर और 98 करोड़ रुपये जन सुराज पार्टी को दान में दिए गए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ये रकम सलाहकार शुल्क और पेशेवर सेवाओं के लिए थी, न कि रिश्वत।
रिपोर्ट पर सत्ताधारी और विपक्ष की प्रतिक्रिया:
सम्राट चौधरी ने कहा कि आरोप उचित फोरम पर जाने चाहिए और पहले प्रशांत किशोर खुद अपने भ्रष्टाचार का जवाब दें। वहीं, प्रशांत किशोर ने आरोपों की गंभीरता बताते हुए कहा कि जनता को सभी तथ्य पता होना चाहिए और नोटिस वापस लेने की स्थिति में भी वह 500 करोड़ के भ्रष्टाचार का खुलासा करेंगे।
यह मामला बिहार की राजनीति में नए मोड़ और चुनावी हलचल पैदा कर सकता है, क्योंकि प्रशांत किशोर ने अपने हमले से एनडीए और विपक्ष दोनों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।











