Friday, August 28, 2026
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Tata Punch EV : टाटा पंच ईवी में लगातार खराबी: उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को गाड़ी की पूरी कीमत लौटाने का दिया आदेश

Tata Punch EV
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Tata Punch EV : बिलासपुर के जिला उपभोक्ता आयोग ने टाटा मोटर्स लिमिटेड के खिलाफ एक अहम फैसला सुनाया है। यह मामला टाटा पंच ईवी कार में तकनीकी खामियों को लेकर दर्ज हुआ था। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को कार की पूरी कीमत उपभोक्ता को लौटाने का निर्देश दिया है।

Tata Punch EV : शिकायतकर्ता डॉ. स्वप्न कुमार दत्ता, जो कि 71 वर्षीय वरिष्ठ डॉक्टर हैं, उन्होंने फरवरी 2024 में बिलासपुर स्थित जेडी ऑटोनेशन से 16.25 लाख रुपये में टाटा पंच ईवी खरीदी थी। उन्होंने बताया कि खरीद के कुछ ही समय बाद से कार में लगातार दिक्कतें आने लगीं।

Tata Punch EV : डॉ. दत्ता के अनुसार, कंपनी ने एक बार चार्ज करने पर 421 किलोमीटर की रेंज का दावा किया था, जबकि वास्तव में कार मुश्किल से 200 किलोमीटर ही चल पाती थी। इसके अलावा, एसी की कार्यक्षमता बेहद खराब थी, कार कभी भी अचानक बंद हो जाती थी, और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बार-बार फेल होता रहा।

Tata Punch EV : उन्होंने अधिवक्ता एचएपीएस भाटिया के माध्यम से आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग की पीठ में अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पांडे शामिल थे।

Tata Punch EV : आयोग ने पाया कि 17 महीनों के भीतर डॉ. दत्ता को 10 से ज्यादा बार कार को सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा, लेकिन समस्याएं लगातार बनी रहीं। जांच में यह भी सामने आया कि 15 नवंबर और 11 दिसंबर 2024 को कार का पूरा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फेल हो गया था। 7 फरवरी 2025 को वाहन पूरी तरह बंद हो गया और जुलाई 2025 तक महज 8145 किलोमीटर ही चल पाया था।

Tata Punch EV : इसके आधार पर आयोग ने टाटा मोटर्स को आदेश दिया कि 45 दिन के भीतर डॉ. दत्ता को वाहन की पूरी कीमत 16,25,604 रुपये लौटाई जाए। साथ ही, देरी होने पर कंपनी को 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

Tata Punch EV : इसके अलावा, उपभोक्ता को मानसिक क्षति के लिए 25,000 रुपये और वाद व्यय के तौर पर 10,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
डॉ. दत्ता ने यह भी बताया कि कंपनी ने 50,000 रुपये का एक चार्जर भी जबरन बेचा, जो सेवा की गुणवत्ता पर और भी सवाल खड़े करता है।
इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं में उम्मीद जगी है कि अगर किसी उत्पाद में बार-बार तकनीकी खराबी आती है, तो उपभोक्ता कानून के तहत उन्हें पूरा न्याय मिल सकता है।

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