Sunday, August 30, 2026
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Bastar Dussehra : इतिहास और आस्था का संगम : 75 दिन का बस्तर दशहरा, आज से होगा शुरू…..

Bastar Dussehra
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Bastar Dussehra : जगदलपुर। छत्तीसगढ़ का विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व आज डेरी गड़ाई की रस्म के साथ शुरू हो गया है। यह पर्व दुनिया का सबसे लंबा दशहरा माना जाता है, जो पूरे 75 दिनों तक चलता है। यह पर्व देवी दुर्गा नहीं, बल्कि स्थानीय आदिम देवी-देवताओं और बस्तर की अनूठी संस्कृति को समर्पित है।

Bastar Dussehra : पर्व का महत्व और इतिहास

बस्तर दशहरा का इतिहास 600 साल से भी ज्यादा पुराना है। इसे बस्तर के तत्कालीन महाराजा पुरुषोत्तम देव ने 15वीं शताब्दी में शुरू किया था। यह पर्व बस्तर के आदिवासियों और स्थानीय लोगों की आस्था का प्रतीक है, जो यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। इस दौरान 12 से अधिक गाँव और 360 से अधिक समुदायों के लोग एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं।

डेरी गड़ाई: पहली और महत्वपूर्ण रस्म

दशहरे की पहली रस्म डेरी गड़ाई है, जिसमें 10 फीट लंबी सरई की लकड़ी को स्थापित किया जाता है। यह लकड़ी बस्तर के बिरिंगपाल गांव से लाई गई थी, जिसे आज सिरहासार भवन में पूरे विधि-विधान से पूजा गया। इस लकड़ी पर हल्दी लगाई गई और नया कपड़ा बांधा गया। यह रस्म दशहरे की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है, जिसके बाद अन्य रस्में शुरू होती हैं।

Bastar Dussehra

आगामी रस्में:

21 सितंबर: काछन गादी – इस रस्म में एक स्थानीय आदिवासी लड़की को देवी का रूप मानकर उसे कांटेदार झूलों पर बैठाया जाता है, जिससे पर्व को मनाने की अनुमति मिलती है।

23 सितंबर: कलश स्थापना और जोगी बिठाई – इस दिन जोगी (तांत्रिक) को एक गड्ढे में 9 दिनों तक ध्यान करने के लिए बैठाया जाता है, जो पर्व की सफलता के लिए तपस्या करते हैं।

24 से 29 सितंबर: फूल रथ परिक्रमा – इस दौरान विशालकाय रथ को सैकड़ों लोग मिलकर खींचते हैं, जिसमें स्थानीय देवी-देवताओं की मूर्तियाँ होती हैं।

बस्तर दशहरा एक ऐसा पर्व है, जो यहाँ के लोगों को एक सूत्र में पिरोता है और उनकी पारंपरिक आस्था और संस्कृति को जीवित रखता है।

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