Suryakant Tiwari :डीएमएफ घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से सूर्यकांत तिवारी को मिली अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ में रहने पर रोक

Suryakant Tiwari : रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डीएमएफ घोटाले में आरोपी सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें राज्य से बाहर रहने का निर्देश दिया है। यह फैसला जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की डबल बेंच ने सुनाया।

Suryakant Tiwari :सुनवाई के दौरान सूर्यकांत तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और शशांक मिश्रा ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से महेश जेठमलानी और एडिशनल एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सशर्त जमानत दी। इससे पहले इसी मामले में निलंबित IAS रानू साहू, समीर बिश्नोई और सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट से राज्य से बाहर रहने की शर्त पर जमानत मिल चुकी है।

Suryakant Tiwari :क्या है डीएमएफ घोटाला

 

Suryakant Tiwari :ईडी की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने धारा 120-बी और 420 के तहत केस दर्ज किया। जांच में सामने आया कि कोरबा जिले में डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) से जुड़े टेंडरों में व्यापक स्तर पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं। ठेकेदारों को अवैध लाभ पहुंचाया गया और भारी कमीशन वसूले गए।

Suryakant Tiwari :25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन की बात

Suryakant Tiwari :ईडी की जांच में सामने आया कि ठेकेदारों से अफसरों और नेताओं को कांट्रैक्ट अमाउंट का 25% से 40% तक कमीशन दिया गया। इन पैसों को विक्रेताओं द्वारा आवासीय खर्च के रूप में दर्ज किया गया। तलाशी में कई फर्जी फर्मों के दस्तावेज, स्टाम्प, डिजिटल डिवाइसेस और 76.50 लाख रुपए नगद जब्त किए गए। साथ ही आठ बैंक खाते सीज किए गए, जिनमें 35 लाख रुपये जमा थे।

Suryakant Tiwari :ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों कर रही जांच

 

Suryakant Tiwari :डीएमएफ एक ट्रस्ट है, जो खनन से प्रभावित लोगों के लिए काम करता है। इस घोटाले की जांच ईडी और राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) दोनों कर रही हैं। आरोप है कि अफसरों और नेताओं की मिलीभगत से खजाने से भारी रकम की बंदरबांट की गई।

Suryakant Tiwari :ईडी को क्या मिला जांच में

Suryakant Tiwari :ईडी का दावा है कि जब रानू साहू रायगढ़ और कोरबा में कलेक्टर थीं, तब डीएमएफ से जुड़े टेंडरों में गड़बड़ी की गई। उन्हें ठेकेदारों से मोटी रिश्वत मिली। ईडी ने कहा कि ठेकेदारों ने कार्य प्राप्त करने के लिए अधिकारियों और नेताओं को 25 से 40 प्रतिशत तक अवैध भुगतान किया। ईओडब्ल्यू ने ईडी की सूचना पर जनवरी 2024 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।

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