Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का त्योहार आज, 29 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद पूरा होता है। ऐसे में दिनभर व्रत रखने वाली महिलाओं को सबसे ज्यादा इंतजार चांद निकलने का रहता है।
छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर समेत कई शहरों में महिलाएं चंद्रोदय के समय के अनुसार पूजा की तैयारी करती हैं। हालांकि, चांद निकलने का समय शहर की भौगोलिक स्थिति और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
रायपुर में करवा चौथ का चांद कब निकलेगा?
राजधानी रायपुर में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन का इंतजार करेंगी। चांद निकलने पर उसे अर्घ्य दिया जाएगा और पति की लंबी उम्र की कामना की जाएगी। इसके बाद पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोला जाएगा।
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बिलासपुर में चंद्रोदय का समय
बिलासपुर में भी करवा चौथ को लेकर महिलाओं में उत्साह रहता है। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को पूजा करती हैं और चंद्रमा के दर्शन होने पर व्रत पूरा करती हैं। रायपुर और बिलासपुर में चंद्रोदय के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
जगदलपुर में कब दिखेगा करवा चौथ का चांद?
बस्तर संभाग के जगदलपुर में भी करवा चौथ की पूजा के बाद महिलाओं को चांद निकलने का इंतजार रहेगा। चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। मौसम में बादल होने पर चांद दिखाई देने में परेशानी हो सकती है, लेकिन धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा की तैयारी चंद्रोदय के समय को ध्यान में रखकर की जाती है।
अंबिकापुर में चांद निकलने का समय
सरगुजा संभाग के अंबिकापुर में भी करवा चौथ का व्रत श्रद्धा के साथ रखा जाता है। महिलाएं शाम को पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन का इंतजार करती हैं। यहां चंद्रोदय का समय दूसरे शहरों से कुछ अलग हो सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को देखना उचित रहेगा।
करवा चौथ की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
करवा चौथ पर महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं। चंद्रमा निकलने पर उसे अर्घ्य देने, पति के दर्शन करने और उनके हाथों जल ग्रहण करने की परंपरा है। पूजा की थाली और आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखने से चांद निकलने के समय जल्दबाजी नहीं होती।
रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर के सटीक चंद्रोदय समय की यहां स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। इसलिए किसी निश्चित समय को अंतिम मानने से पहले स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय चंद्रोदय गणना से जरूर मिलान करें।