कवर्धा। Nishaanebaz.com-Baiga Children Death Case: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के अंतर्गत आने वाले नंदनी कुमान गांव में पांच आदिवासी बैगा बच्चों की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कुछ दिन पहले कांग्रेस की सात सदस्यीय जांच टीम के बाद आज आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सीधे प्रभावित गांव का दौरा किया। कांग्रेस के इन शीर्ष नेताओं ने मृतक बच्चों के शोकाकुल परिजनों और ग्रामीणों से मुलाकात कर जमीनी हकीकत जानी, जिसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं, कुपोषण और सरकारी योजनाओं के लचर क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
दौरे के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य के दूरस्थ अंचलों में रहने वाले आदिवासी बैगा परिवारों तक मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों तक ही सीमित है। गांव में कुपोषण की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और पांच बच्चों की अचानक हुई मौत के मामले में प्रशासनिक लापरवाही की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवारों को उचित न्याय व मुआवजा देने की पुरजोर मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि इस मुद्दे को केवल प्रांतीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी जोर-शोर से उठाया जाएगा।

गौरतलब है कि इस घटना के बाद से हड़कंप मचा हुआ है और करीब 16 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया जा रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे और जांच कर रही हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की यह बदहाली और बच्चों की मौतें शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि इस मामले की जांच कब तक पूरी होगी, किसकी जवाबदेही तय की जाएगी और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाएगी।
विपक्ष के इस आक्रामक रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से मांग की है कि बैगा बहुल गांवों में विशेष मेडिकल कैंप लगाकर स्वास्थ्य और पोषण स्तर की नियमित निगरानी की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।