नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Liquor Rule Change 2026: आगामी 1 नवंबर से सरकारी दुकानों से शराब खरीदने की पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। सरकार द्वारा पारदर्शी व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) की सभी सरकारी शराब दुकानों पर एक बार में 1,000 रुपये से अधिक की खरीदारी करने पर डिजिटल पेमेंट अनिवार्य कर दिया गया है। नए आदेश के तहत यदि शराब का कुल बिल 1,000 रुपये से ऊपर जाता है, तो ग्राहक नकद यानी कैश में भुगतान नहीं कर सकेंगे। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड जैसे डिजिटल माध्यमों का ही उपयोग करना पड़ेगा, जबकि 1,000 रुपये तक की छोटी खरीदारी पर नकद या डिजिटल दोनों तरह के भुगतान के विकल्प मौजूद रहेंगे।
सरकारी स्तर पर लागू की जा रही इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नकद लेनदेन को कम करने के साथ-साथ शराब की दुकानों पर अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतों पर पूरी तरह लगाम लगाना है। वर्तमान में राज्य भर में संचालित कुल 4,048 सरकारी शराब दुकानों पर UPI और कार्ड स्वाइप की सुविधा पहले से मौजूद होने के बावजूद अधिकांश ग्राहक कैश में लेनदेन करते हैं। रोजाना बड़ी मात्रा में नकदी का प्रबंधन करने, फर्जी नोटों की समस्या और राशि को सुरक्षित बैंक तक पहुंचाने में आ रही प्रशासनिक कठिनाइयों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, जिससे अब पूरी बिक्री का स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज हो सकेगा।
इस नए नियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सख्त गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं, जिसके तहत शराब दुकान का कोई भी कर्मचारी ग्राहकों से अपने निजी क्यूआर कोड या व्यक्तिगत बैंक खाते में राशि ट्रांसफर नहीं करा सकेगा। ऑनलाइन भुगतान केवल दुकान की अधिकृत पीओएस (POS) मशीन या आधिकारिक पेमेंट सिस्टम के जरिए ही स्वीकार किया जाएगा, और नियम का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, आधिकारिक मशीन से बिल की रसीद जनरेट होने और भुगतान की पुष्टि होने के बाद ही शराब की बोतल ग्राहक को सौंपी जाएगी, जिससे वित्तीय गड़बड़ियों की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
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1 नवंबर 2026 से लागू हो रहे इस नियम के बाद बड़ी मात्रा में शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं को दुकानों पर जाने से पहले अपने साथ डिजिटल भुगतान के साधन रखना अनिवार्य होगा। प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि हर एक ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड सिस्टम में दर्ज होने से दुकानों की वास्तविक बिक्री और जमा रकम का मिलान करना बेहद आसान हो जाएगा। साथ ही, उपभोक्ताओं से मनमानी कीमत वसूलने और तय रेट से अधिक पैसे ऐंठने जैसी पुरानी समस्याओं पर भी तकनीकी सर्विलांस के जरिए प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।