बैतूल (शशांक सोनकपुरिया)। Nishaanebaz.com-Betul Forest Encroachment Case: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में जंगलों की अंधाधुंध कटाई और अवैध अतिक्रमण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे समूचे क्षेत्र के पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। सत्ताधारी दल के प्रदेशाध्यक्ष के गृह जिले में स्थित पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाली गवासेन रेंज इन दिनों भ्रष्टाचार, मिलीभगत और सुरक्षा के दावों की पोल खोल रही है। हालात यह हैं कि यहां धड़ल्ले से हरे-भरे जंगलों का सफाया किया जा रहा है और पूरा जिला आने वाले समय में सूखाग्रस्त होने की कगार पर खड़ा नजर आ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की नींद अब तक नहीं टूटी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाली गवासेन रेंज की सर्किल बाला डोंगरी का चिट्ठू पूरा क्षेत्र वर्तमान में पूरी तरह अतिक्रमणकारियों के कब्जे की चपेट में आ चुका है। इस क्षेत्र में बेशकीमती जमीनों पर कब्जा कर हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों और सूत्रों के अनुसार, गवासेन रेंज में डिप्टी रेंजर बाथम की कथित शह पर यह पूरा अवैध कारोबार चल रहा है, जहां वन विभाग के मैदानी अमले की खामोशी गहरी सांठगांठ की ओर साफ इशारा कर रही है।
इस गंभीर वन-विनाश को लेकर मीडिया द्वारा लगातार जमीनी हकीकत को प्रमुखता से उजागर किया गया है, लेकिन इसके बावजूद विभागीय स्तर पर आज तक कोई ठोस या बड़ी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। इस पूरे प्रकरण में पश्चिम वन मंडल के डीएफओ और वन वृत्त के प्रमुख सीसीएफ की कार्यप्रणाली भी गंभीर संदेह के घेरे में आ गई है। अब क्षेत्र में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध कब्जे और जंगल की बर्बादी पर उच्चाधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ रही है, और क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण का परिणाम।
चूंकि यह पूरा मामला भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के गृह जिले से जुड़ा हुआ है, इसलिए राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इसकी चर्चा बेहद तेज हो गई है। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों ने अब सूबे के वन मंत्री और शासन के उच्च स्तर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जनता और स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि भोपाल स्तर से एक निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए, क्योंकि यदि समय रहते दोषियों और संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र का पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएगा।