इंदौर। Nishaanebaz.com-DAVV Indore Gen Z Charcha: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में आयोजित ‘Gen-Z चर्चा’ कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने शिरकत की। युवाओं में धैर्य की कमी, सोशल मीडिया पर दिखावे वाली भक्ति, राजनीति में युवाओं की सीमित भागीदारी और जीवन में असफलता से टूटने की प्रवृत्ति जैसे समसामयिक मुद्दों पर उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपनी दिनचर्या और अनुभवों के जरिए युवाओं को जीवन में स्थिरता और धैर्य विकसित करने के व्यावहारिक तरीके बताए।
‘Gen-Z यूज़लेस नहीं, यूज़्ड-लेस है’
चर्चा के दौरान पंडित इंद्रेश उपाध्याय का सबसे चर्चित संदेश रहा— “Gen-Z यूज़लेस (बेकार) नहीं है, बल्कि यूज़्ड-लेस (कम उपयोग की गई) है।” उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में असीम ऊर्जा और क्षमता है, लेकिन उन्हें राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक संस्थाओं में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘केयर-लेस’ के बजाय युवाओं को ‘केयर्ड-लेस’ महसूस कराया जा रहा है, यानी उनकी जरूरतों और भविष्य पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
30 दिन नाम जप का प्रयोग: खुद महसूस होगा बदलाव
युवाओं में घटते धैर्य और बढ़ते अधैर्य पर बात करते हुए उन्होंने एक 30 दिनों का व्यावहारिक प्रयोग सुझाया:
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नियमित जप: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लगातार 30 दिनों तक किसी एक नाम— जैसे ‘राम-राम’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ का नियमित जप करें।
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आचार-विचार में शुद्धता: नाम जप के साथ-साथ अपने खानपान, व्यवहार और विचारों में शुद्धता बनाए रखें।
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क्रोध और त्वरित प्रतिक्रिया पर नियंत्रण: उन्होंने कहा कि लगातार नाम जपने से किसी बात पर तुरंत क्रोधित होने या तीखी प्रतिक्रिया देने की आदत में सुधार आता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी खुद को संभालना सीख जाता है।
व्यास मंच की जिम्मेदारी और व्यस्त दिनचर्या
अपनी व्यस्त दिनचर्या का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि गुजरात के कच्छ से लेकर इंदौर तक की उड़ानों के डायवर्ट होने और घंटों की सड़क यात्रा के बाद भी मंच पर हजारों लोगों के सामने स्थिर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बाहर से देखकर किसी के जीवन को आसान नहीं मानना चाहिए। हर व्यक्ति के जीवन में संघर्ष है, इसलिए दूसरों को समझने और अपने भीतर स्थिरता विकसित करने की जरूरत है।
युवाओं को दिए व्यवहारिक सुझाव:
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गॉसिप और चुगली से दूरी: व्यर्थ की बातों, दूसरों की आलोचना और चुगली में समय नष्ट न करें। अगर किसी के बारे में नकारात्मक बात सुनें तो मौन रहें।
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सोशल मीडिया और भक्ति का भाव: महाकाल या वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों पर जाकर केवल ट्रेंडिंग रील या पोस्ट बनाने तक सीमित न रहें, बल्कि वहां के आध्यात्मिक अनुभव को भीतर महसूस करें।
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सकारात्मक आलोचना स्वीकारें: आलोचना से नाराज होने के बजाय यह देखें कि सामने वाला किस कमी की ओर ध्यान दिला रहा है, जिससे खुद में सुधार किया जा सके।
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संस्कृति को समझें: केवल बाहरी पहनावे के बजाय भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के अर्थ को गहराई से समझें।
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का दिया उदाहरण
देवी अहिल्याबाई होल्कर के लोक कल्याणकारी और सार्वजनिक कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता या भौतिक सुविधाएं पाना नहीं होना चाहिए। युवाओं को ऐसे लक्ष्य तय करने चाहिए जिससे समाज और आने वाली पीढ़ियों का उत्थान हो सके।
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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में हुई इस परिचर्चा का मुख्य संदेश यही रहा कि युवाओं की क्षमता का सही इस्तेमाल किया जाना चाहिए और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक मजबूती, करुणा और धैर्य को अपनाना बेहद जरूरी है।