Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला उपवास करती हैं। शाम को पूजा और व्रत कथा सुनने के बाद चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्र दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण करने की परंपरा है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, करवा चौथ की कथा और पूजा पूरी करने के बाद चंद्रोदय होने पर अर्घ्य देना चाहिए। इसके लिए एक साफ कलश या लोटे में जल भरें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उसमें अक्षत या चांदी का सिक्का रख सकते हैं।
चंद्रमा के दर्शन करने के बाद उन्हें जल अर्पित करें और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें। इसके बाद छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा निभाई जाती है। अंत में पति के हाथों से जल और मिठाई ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।
अर्घ्य देते समय इन मंत्रों का करें जाप
चंद्रमा की पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार मंत्रों का जाप कर सकते हैं। प्रचलित चंद्र मंत्रों में शामिल हैं:
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः।
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नमः।
चंद्रदेव की स्तुति के लिए इस मंत्र का भी पाठ किया जाता है:
ॐ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम्।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुटभूषणम्॥
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्रदेव की आराधना मन की शांति और वैवाहिक सुख की कामना से जुड़ी है।
करवा चौथ 2026 पर चांद कब निकलेगा?
इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में चंद्रमा के दर्शन रात करीब 8:17 बजे होने की संभावना है। हालांकि, चंद्रोदय का समय शहर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग या स्थानीय विश्वसनीय समय-सारणी से समय की पुष्टि कर लें।
पूजा का शुभ मुहूर्त
दी गई पंचांग जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ पूजा का शुभ समय शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक बताया गया है। चतुर्थी तिथि रात 10:09 बजे तक रहने की जानकारी भी दी गई है। पूजा और व्रत से जुड़े समय में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर संभव है।
विशेष परिस्थितियों में क्या करें?
सूतक, पातक या मासिक धर्म जैसी परिस्थितियों में पूजा के नियमों को लेकर अलग-अलग पारिवारिक और धार्मिक परंपराएं प्रचलित हैं। ऐसी स्थिति में अपने परिवार की मान्यता का पालन करें और जरूरत होने पर किसी जानकार आचार्य से सलाह लें।