इंदौर। Nishaanebaz.com-Indore Handcart Removal Controversy: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में त्योहारी सीजन के दौरान नगर निगम की रिमूवल गैंग द्वारा सड़क किनारे ठेला लगाने वाले छोटे कारोबारियों पर की जा रही कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ठेला संचालकों की रोजी-रोटी पर मंडराते संकट को देखते हुए स्थानीय पार्षद कुणाल सोलंकी उनके समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आए हैं। शुक्रवार को पार्षद सोलंकी बड़ी संख्या में पीड़ित ठेला संचालकों के साथ इंदौर नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और अपर आयुक्त आकाश सिंह से मुलाकात कर जब्त किए गए सभी ठेलों की सूची सौंपी। पार्षद के अनुसार, अपर आयुक्त ने सूची का सत्यापन करवाकर सभी जब्त ठेले वापस छोड़ने का सकारात्मक आश्वासन दिया है।
इंदौर शहर में दीपावली और अन्य त्योहारों के मद्देनजर बाजारों में उमड़ रही भीड़ के बीच नगर निगम द्वारा लगातार ठेले हटाने और उन्हें जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई का तीखा विरोध करते हुए पार्षद कुणाल सोलंकी ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां केंद्र और राज्य सरकारें ‘पीएम स्वनिधि’ और अन्य योजनाओं के माध्यम से छोटे स्ट्रीट वेंडर्स और ठेला चालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कम ब्याज पर लोन मुहैया करा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम की रिमूवल टीम त्योहार के समय इनके ठेले जब्त कर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की भारी-भरकम चालानी रसीदें काट रही है, जिससे इन गरीब परिवारों का त्यौहार पूरी तरह फीका पड़ गया है।
इंदौर में ठेला संचालकों के समर्थन में पार्षद कुणाल सोलंकी उतरे मैदान में, नगर निगम ने जब्त ठेले लौटाने का दिया आश्वासन।
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पार्षद ने नगर निगम की नीतिगत और मैदानी लापरवाही को उजागर करते हुए बताया कि वर्ष 2022 में ही उनके वार्ड क्षेत्र में व्यवस्थापन के लिए एक व्यवस्थित ‘हॉकर जोन’ (Hawker Zone) बनाने का औपचारिक प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन विडंबना यह है कि वर्ष 2026 आ जाने के बावजूद अब तक नगर निगम का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने तक नहीं पहुंचा। जब प्रशासन स्वयं हॉकर जोन की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है, तो गरीबों के वैध रोजगार पर इस तरह डंडा चलाना पूरी तरह अनुचित और तानाशाही रवैया है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले इंदौर के नेमावर रोड स्थित पालदा औद्योगिक क्षेत्र में भी नगर निगम द्वारा ठेले हटाने की कार्रवाई के दौरान भारी हंगामा और बवाल हुआ था। उस समय भी पार्षद कुणाल सोलंकी ठेला संचालकों के साथ नगर निगम की जब्ती गाड़ी के आगे जमीन पर बैठ गए थे और जोरदार धरना-प्रदर्शन किया था। पार्षद ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने अपनी इस दमनकारी कार्रवाई को तुरंत बंद नहीं किया और जब्त ठेले सम्मानपूर्वक वापस नहीं लौटाए, तो वे ठेला संचालकों को एकजुट कर निगम मुख्यालय के खिलाफ बड़ा और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
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इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद शहर के छोटे व्यापारियों में जहां राहत की उम्मीद जगी है, वहीं नगर निगम प्रशासन की रिमूवल नीति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि अपर आयुक्त के आश्वासन के बाद ठेले कब तक वापस सौंपे जाते हैं।