Stock Market : नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों की कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर दिखाई दे रहा है। बीते चार कारोबारी सत्रों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य करीब 20.79 लाख करोड़ रुपये घट गया है। वहीं, पूरे कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स 1,600 अंकों से ज्यादा टूट गया।
शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 73,123.83 के स्तर पर बंद हुआ। छुट्टियों के कारण छोटे रहे कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स कुल 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत नीचे आ गया।
आंकड़ों के मुताबिक, 16 अक्टूबर को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4,72,62,167.42 करोड़ रुपये था, जो चार कारोबारी सत्रों में घटकर 4,51,83,393.14 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब 20.79 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
1\. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा संभावित अमेरिकी-इजरायली हमलों की आशंकाओं से निवेशक सतर्क हो गए हैं। क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की स्थिति में तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा भी बाजार की चिंता बढ़ा रहा है।
2\. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 3 प्रतिशत बढ़कर 116.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। महंगे तेल से भारत के आयात बिल और परिवहन लागत में बढ़ोतरी का खतरा है। इसका असर महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।
3\. महंगाई बढ़ने की आशंका
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की चिंता गहरा गई है। ईंधन और परिवहन महंगा होने से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इससे कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ने की आशंका है। इसी चिंता के चलते निवेशक जोखिम वाले शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं।
4\. अमेरिकी बाजारों में कमजोरी
अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार के निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा है। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर सतर्क रुख अपनाते हैं। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से भी निवेश के विकल्पों और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
5\. रुपये में कमजोरी
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी घरेलू शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का जोखिम रहता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ रुपये की कमजोरी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दोहरा दबाव डाल सकती है।
टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स की कंपनियों में टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स के शेयर 3 प्रतिशत से अधिक टूटे। इनके अलावा ट्रेंट, टेक महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), इंडिगो, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एनटीपीसी, एसबीआई और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए।
हालांकि, बाजार में कुछ कंपनियों के शेयरों ने मजबूती भी दिखाई। इटरनल, एलएंडटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
अगले सप्ताह इन बड़े घटनाक्रमों पर रहेगी नजर
आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कई अहम घटनाक्रमों पर रहेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ को 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होने वाले हैं। इसकी लिस्टिंग से बाजार के रुझान को लेकर संकेत मिल सकते हैं।
इसके अलावा 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक भी महत्वपूर्ण होगी। ब्याज दरों को लेकर मिलने वाले संकेत वैश्विक बाजारों की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। पेटीएम, टाटा कंज्यूमर, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, ट्रेंट, सन फार्मा और बीईएल जैसी कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। अमेरिकी जीडीपी, बेरोजगारी के आंकड़े और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर संबंधी फैसले भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
Stock Market : क्या शेयर बाजार में आएगी तेजी?
Stock Market : आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, तेल महंगा बना रहने और वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने की स्थिति में बाजार पर दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और जोखिम को ध्यान में रखें।