रायपुर। Nishaanebaz.com-CSPDCL Online Billing Negligence: छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा राजधानी रायपुर के उपभोक्ताओं को कथित रूप से चूना लगाने के नए-नए तरीके अपनाने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। स्मार्ट मीटर की अनिश्चितताओं और बिजली टैरिफ दरों में हालिया इजाफे से आम उपभोक्ता पहले ही आर्थिक बोझ तले दबा हुआ है, वहीं अब ‘मोर बिजली ऐप’ (More Bijli App) में जान-बूझकर ऑनलाइन बिल देर से अपलोड करने का खेल सामने आ रहा है। नियत तिथि बीत जाने के बाद अधिभार (Surcharge) जोड़कर बिल वसूला जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को हर महीने 10 से 20 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं।
इंद्रप्रस्थ फेस-2 के उपभोक्ता ने खोली व्यवस्था की पोल
राजधानी के इंद्रप्रस्थ फेस-2 निवासी एक पीड़ित उपभोक्ता ने कंपनी की इस मनमानी की पूरी पोल खोलकर रख दी है। उपभोक्ता के अनुसार, पिछले दो महीनों से उसके ऑनलाइन बिजली बिल जनरेट करने में लगातार जान-बूझकर देरी की जा रही है। जब तक ऑनलाइन सिस्टम अपडेट होता है, तब तक फिजिकल बिल में दर्ज नियत तिथि बीत चुकी होती है।
उपभोक्ता ने बताया कि उसे सितंबर महीने का फिजिकल बिल 9 अक्टूबर को प्राप्त हो चुका था, जिसमें भुगतान की नियत तिथि 16 अक्टूबर अंकित थी। लेकिन 20 अक्टूबर की तारीख बीत जाने के बाद भी मोर बिजली ऐप पर सितंबर का बिल अपलोड ही नहीं हुआ है और ऐप पर अभी भी अगस्त महीने का ही बिल दिखाई दे रहा है।
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न मोबाइल मैसेज आया और न व्हाट्सएप्प पर अलर्ट
कंपनी के बड़े-बड़े दावों के विपरीत, न तो उपभोक्ता के मोबाइल पर कोई सामान्य एसएमएस (SMS) भेजा गया और न ही व्हाट्सएप्प पर बिल का अलर्ट आया। ऐप पर बिल शो न होने के कारण उपभोक्ता चाहकर भी समय पर ऑनलाइन भुगतान नहीं कर पाया।
पीड़ित ने बताया कि ऐसा ही खेल पिछले महीने (अगस्त) में भी खेला गया था। नियत समय बीत जाने के बाद 17 सितंबर को सीधे अधिभार जोड़कर बिल अपलोड किया गया था। जो फिजिकल बिल 350 रुपये का था, वही ऑनलाइन में 360 रुपये होकर आया।
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निम्न व मध्यम वर्ग में भारी आक्रोश, उठ रही जांच की मांग
डिजिटल इंडिया और त्वरित नागरिक सेवाओं का ढोल पीटने वाले बिजली विभाग की इस कारस्तानी से निम्न और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं में बेहद गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक उपभोक्ता की समस्या नहीं है, बल्कि हजारों उपभोक्ताओं से 10-20 रुपये के नाम पर हर महीने लाखों रुपये की अवैध उगाही का अप्रत्यक्ष जरिया बन चुका है। लोग प्रशासन और शासन से मोर बिजली ऐप की तकनीकी लेट-लतीफी पर लगाम लगाने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।