गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़। Nishaanebaz.com-Gharghoda Encroachment Controversy: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा नगर में निर्माण कार्य को लेकर एक ऐसा गंभीर और संदिग्ध मामला सामने आया है, जिसने शासकीय भूमि की सुरक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं के संरक्षण और स्थानीय प्रशासनिक निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर में पहले से निर्मित जनसुविधा वाले यात्री प्रतीक्षालय (Passenger Waiting Room) को तोड़कर नया निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, यह निर्माण शासकीय कृषि कार्यालय की दीवार से बिल्कुल सटाकर किया जा रहा है, जिससे कार्यालय की खिड़कियां पूरी तरह से ढकने की कगार पर पहुंच गई हैं।
निजी बेजा कब्जा या सरकारी निर्माण? मौके पर उठे कई यक्ष प्रश्न
निर्माण स्थल की स्थिति को देखते हुए सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस निर्माण की अनुमति किस अधिकारी ने और किस आधार पर दी? क्या यह किसी रसूखदार व्यक्ति द्वारा शासकीय जमीन पर किया जा रहा बेजा कब्जा है या फिर किसी विभाग का अधिकृत सरकारी निर्माण कार्य?
अगर यह किसी विभाग का सरकारी निर्माण कार्य है, तो क्या इसके लिए विधिवत तकनीकी स्वीकृति, ले-आउट नक्शा और सक्षम अधिकारी का कार्यादेश जारी किया गया है? और यदि यह किसी निजी व्यक्ति का निर्माण है, तो आम जनता के उपयोग के लिए बने सरकारी यात्री प्रतीक्षालय को ध्वस्त करने तथा शासकीय कार्यालय की दीवार और हवा-रोशनी रोकने वाली खिड़कियों को प्रभावित करने की अनुमति आखिर किस नियम के तहत दी गई?
जनसुविधा पर चोट और शासकीय संपत्ति की सुरक्षा पर उठे सवाल
यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण आम राहगीरों और यात्रियों को धूप-बारिश से राहत देने के लिए जनहित में कराया जाता है। ऐसे में एक स्थापित प्रतीक्षालय को तोड़कर नया ढांचा खड़ा करना सीधे तौर पर सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान और जनसुविधा पर आघात है। वहीं, दूसरी ओर शासकीय कृषि कार्यालय के ठीक पास निर्माण होने से कार्यालय के संचालन, सुरक्षा और प्राकृतिक हवा-रोशनी की व्यवस्था पूरी तरह से ठप होने की आशंका जताई जा रही है।
कलेक्टर से होगी लिखित शिकायत, निष्पक्ष जांच की उठी मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नागरिकों और प्रतिनिधियों द्वारा रायगढ़ जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत करने की तैयारी की जा रही है। मांग की जाएगी कि निर्माण स्थल का तत्काल सीमांकन (Land Demarcation) कराया जाए, भूमि के मालिकाना हक की जांच हो और यात्री प्रतीक्षालय को तोड़े जाने के कारणों का खुलासा किया जाए। साथ ही, संबंधित निर्माण की स्वीकृति और कार्यादेश (Work Order) को सार्वजनिक करने की मांग की गई है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस संदिग्ध निर्माण पर क्या एक्शन लेता है।