कारोबार डेस्क। Nishaanebaz.com-India 5 Trillion Dollar Economy: भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर तेजी से उभर रही है और तमाम चुनौतियों के बावजूद नए मुकाम हासिल कर रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा अनुमानों ने देश के आर्थिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत होने के बावजूद रुपये की गिरती कीमत (Exchange Rate Depreciation) के कारण भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर (5 लाख करोड़ डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य अब एक साल आगे खिसक गया है। IMF के नए आंकड़ों के अनुसार, यह प्रतिष्ठित लक्ष्य अब 2028 के बजाय 2029 में हासिल होने की उम्मीद है।
रुपये की गिरावट से कैसे बिगड़ा डॉलर में GDP का गणित
आईएमएफ (IMF) के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) डेटाबेस के ताज़ा अनुमानों के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 4.06 लाख करोड़ डॉलर, 2027 में 4.52 लाख करोड़ डॉलर और 2029 में 5.54 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इससे पहले अप्रैल में अनुमान लगाया गया था कि भारत 2028 तक 5 लाख करोड़ डॉलर का आंकड़ा पार कर लेगा, लेकिन अब 2028 के लिए जीडीपी का अनुमान घटाकर 4.996 लाख करोड़ डॉलर कर दिया गया है।
इस देरी की मुख्य वजह देश की आंतरिक विकास दर में कमी नहीं, बल्कि डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में आया बदलाव है। IMF ने 2028 के लिए एक डॉलर के मुकाबले रुपये की औसत विनिमय दर का अनुमान 93.3 रुपये से बढ़ाकर 95.5 रुपये कर दिया है। इस साल की शुरुआत से रुपया लगातार दबाव में है और डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। रुपये में नॉमिनल जीडीपी का आंकड़ा बढ़ने के बावजूद, जब इसे डॉलर में बदला जाता है, तो विनिमय दर के अंतर के कारण डॉलर के रूप में आंकी जाने वाली आर्थिक ताकत लगभग 63 अरब डॉलर कम हो जाती है।
2027 में जापान और ब्रिटेन को पीछे छोड़ सकता है भारत
भले ही 5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा छूने में एक साल की देरी का अनुमान जताया गया हो, लेकिन वैश्विक रैंकिंग के मामले में भारत एक बड़ी छलांग लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है। IMF के अक्टूबर 2026 के अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2027 में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, और इस दौरान वह ब्रिटेन और जापान दोनों को पीछे छोड़ देगा।
उस वर्ष भारत की कुल जीडीपी 4.52 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि इसके मुकाबले ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 4.49 लाख करोड़ डॉलर और जापान की जीडीपी 4.47 लाख करोड़ डॉलर पर रह सकती है। वैश्विक रैंकिंग में इस समय भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी ही बने रहेंगे। चूंकि इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतर बहुत कम है, इसलिए विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव इस रैंकिंग को प्रभावित कर सकते हैं।
2031 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह
लंबी अवधि के अनुमानों पर नजर डालें तो भारत की आर्थिक रफ्तार का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। IMF के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2030 में 6.13 लाख करोड़ डॉलर और 2031 में 6.74 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। इस मुकाम पर पहुंचकर भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लेगा। हालांकि, यह सभी पूर्वानुमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, घरेलू नीतियों और रुपये की चाल पर पूरी तरह निर्भर करेंगे।